देश की खबरें | दो कानूनी मुद्दों की वजह से करीब 50 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की पर स्थगन : ईडी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धनशोधन निरोधक कानून के तहत अनंतिम रूप से कुर्क संपत्तियों को लेकर दो कानूनी मुद्दे हैं जिनकी वजह से ‘व्यापक’ मुकदमेबाजी हुई है और 50,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों की अंतिम कुर्की पर स्थगन आदेश पारित हुआ है। एक नवीनतम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
नयी दिल्ली, दो मई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धनशोधन निरोधक कानून के तहत अनंतिम रूप से कुर्क संपत्तियों को लेकर दो कानूनी मुद्दे हैं जिनकी वजह से ‘व्यापक’ मुकदमेबाजी हुई है और 50,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों की अंतिम कुर्की पर स्थगन आदेश पारित हुआ है। एक नवीनतम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
संघीय जांच एजेंसी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच के दौरान उन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का अधिकार है, जिनके बारे में संदेह है कि वे ‘‘अपराध की आय’’ से अर्जित हैं। इस तरह के अनंतिम आदेश को जारी होने के 180 दिनों के भीतर उक्त कानून के न्यायाधिकरण द्वारा पुष्टि की जानी चाहिए।
पीएमएलए 2005 में प्रभावी हुआ और तब से अबतक ईडी ने 1.55 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है, जिनमें से 1.07 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की पुष्टि वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत तक न्यायाधिकरण द्वारा की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया कि दो ‘‘महत्वपूर्ण’’ कानूनी मुद्दों के कारण ‘‘व्यापक’’ मुकदमेबाजी हुई है और परिणामस्वरूप न्यायाधिकरण ने कार्यवाही पर स्थगन आदेश दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहला मुद्दा ‘कोरम नॉन ज्यूडिस’ का सवाल है, जिसका अभिप्राय है कि क्या प्राधिकार में पूर्ण कोरम के अभाव में एक सदस्य द्वारा पुष्टि आदेश वैध रूप से पारित किया जा सकता है या नहीं, विशेषकर जहां कोई न्यायिक सदस्य मौजूद नहीं है।
इसमें कहा गया है कि इस मुद्दे के कारण उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में 100 से अधिक मामलों पर स्थगन आदेश जारी किए गए और कुल 3,803.91 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को लेकर जारी अनंतिम कुर्की आदेश पर रोक लग गई।
न्याय निर्णय प्राधिकरण तीन सदस्यीय निकाय है, जिसमें एक अध्यक्ष तथा विधि के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले एक सदस्य (सदस्य-न्यायिक) तथा प्रशासन, वित्त या लेखाशास्त्र में अनुभव रखने वाले एक अन्य सदस्य शामिल होते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी कानूनी ‘बाधा’, कोविड-19 महामारी जैसी ‘असाधारण’ स्थितियों के दौरान ईडी द्वारा जारी अनंतिम कुर्की आदेशों की पुष्टि के लिए 180-दिवसीय समय सीमा की व्याख्या से संबंधित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी आधार पर दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल 119 याचिकाओं और उच्चतम न्यायालय में इसी प्रकार के अन्य मामलों की वजह 49,620 करोड़ रुपये की अनंतिम कुर्की प्रभावी नहीं हो सकी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एजेंसी को कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वह पीएमएलए, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत हजारों मामलों की जांच की जिम्मेदारी ईडी पर है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले 14 वर्षों से एजेंसी की कोई कैडर समीक्षा नहीं हुई है, जबकि आदर्श रूप से यह प्रक्रिया हर पांच वर्ष में होनी चाहिए।
इसमें कहा गया कि एजेंसी को 2006 में 745 कर्मचारियों की मंजूरी दी गई थी और 2011 में कैडर पुनर्गठन के बाद इसके मानवबल को बढ़ाकर 2,063 कर दिया गया। हालांकि, 2023 में कुछ पदों को समाप्त कर दिया गया, जिससे केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन एजेंसी में कुल पद 2,030 रह गये।
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