देश की खबरें | सात साल से कम जेल की सजा के मामलों में आरोपियों को ‘‘यांत्रिक रूप से’’ गिरफ्तार न करें: न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अधिकतम सात साल की सजा वाले अपराध के मामलों में आरोपी व्यक्ति को ‘‘यांत्रिक रूप से’’ गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।

नयी दिल्ली, दो अगस्त उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अधिकतम सात साल की सजा वाले अपराध के मामलों में आरोपी व्यक्ति को ‘‘यांत्रिक रूप से’’ गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने सभी उच्च न्यायालयों, राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने को कहा है जिनका आठ सप्ताह के भीतर पालन करना होगा।

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने यह निर्देश एक ऐसे व्यक्ति की याचिका पर फैसला करते हुए दिया जिसे उसकी पत्नी द्वारा दर्ज वैवाहिक विवाद के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।

उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने मोहम्मद असफाक आलम को जमानत दे दी और अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य के पहले मामले में जमानत देते समय जारी किए गए निर्देशों की फिर से पुष्टि की। मामले में आलम की ओर से वकील स्मरहर सिंह पेश हुए।

पीठ ने निर्देश जारी करते हुए कहा, ‘‘हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस अधिकारी आरोपियों को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार न करें और मजिस्ट्रेट लापरवाही से और मशीनी तरीके से हिरासत को अधिकृत न करें।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि आमतौर पर जमानत दी जानी चाहिए और गंभीर मामलों में जिसमें लंबी सजा वाले अपराधों या अन्य विशेष अपराधों से संबंधित आरोप शामिल हैं, अदालत को विवेक का प्रयोग करते हुए सतर्क और सावधान रहना चाहिए।

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