देश की खबरें | यूक्रेन संकट पर मतभेदों का भारत-यूरोप संबंधों पर कोई असर नहीं: जर्मन राजदूत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत में जर्मनी के निवर्तमान राजदूत वाल्टर जे लिंडनर ने बुधवार को कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर यूरोप और भारत के बीच मतभेद दोनों पक्षों के संबंधों को प्रभावित नहीं करेंगे।

नयी दिल्ली, एक जून भारत में जर्मनी के निवर्तमान राजदूत वाल्टर जे लिंडनर ने बुधवार को कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर यूरोप और भारत के बीच मतभेद दोनों पक्षों के संबंधों को प्रभावित नहीं करेंगे।

उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे "हमलावर" को यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के परिणाम न भुगतने देने से अन्य देशों को भविष्य में पड़ोस के संदर्भ में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मीडिया ब्रीफिंग में यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारत के पड़ोस के संदर्भ में चीन का जिक्र कर रहे हैं, जर्मन राजदूत ने कुछ स्पष्ट नहीं किया, लेकिन जोर देकर कहा कि दुनिया के हर देश को रूसी आक्रमण के खिलाफ खड़ा होना चाहिए ताकि अन्य हिस्सों में इसी तरह की स्थितियों से बचा जा सके।

यह पूछे जाने पर कि क्या यूक्रेन संकट को लेकर भारत और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद दोनों पक्षों के बीच संबंधों को प्रभावित करेंगे, उन्होंने ‘नहीं’ में जवाब दिया।

राजदूत ने कहा, "नहीं। इसके विपरीत, मुझे लगता है कि पुतिन के युद्ध ने जो दिखाया है वह यह है कि हमें मित्रों की आवश्यकता है, हमें सहयोगियों और लोगों तथा देशों की आवश्यकता है जो लोकतंत्र और आंदोलन की स्वतंत्रता जैसे मूल्यों को साझा करते हैं ... इस प्रकार की चीजों (यूक्रेन संकट) के कारण, हम उदाहरण के लिए यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते की तरफ और अधिक दृढ़ता से देखते हैं।"

यूरोपीय संघ रूसी आक्रमण की तीखी आलोचना करता रहा है और उसने यूक्रेन पर हमले को लेकर मॉस्को पर कई गंभीर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं।

भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा नहीं की है और हिंसा की तत्काल समाप्ति तथा कूटनीति और बातचीत के माध्यम से संकट के समाधान पर जोर देता रहा है।

लिंडनर ने कहा कि यूरोप में यूक्रेन संकट पर भारत की स्थिति को लेकर एक समझ है और रूस के आक्रमण पर संयुक्त राष्ट्र में नयी दिल्ली के मतदान संबंधी रुख का भारत के साथ यूरोपीय संघ के संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

भारत ने रूसी हमले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया था।

जर्मन राजदूत ने कहा कि एक उम्मीद थी कि भारत रूसी आक्रमण की निंदा पर अधिक स्पष्ट होगा, लेकिन उन्होंने कहा कि "हम भारत की स्थिति को समझते हैं क्योंकि हर देश का अलग इतिहास और पड़ोस होता है।"

उन्होंने कहा, "हमने मुद्दे को लेकर भारत पर कभी दबाव नहीं डाला। हम जो हासिल करना चाहते थे वह साधारण तथ्य है कि सैद्धांतिक रूप से एक खतरा है।’’

लिंडनर ने कहा, "और सिद्धांत यह है कि यदि आप किसी हमलावर को, इस मामले में, पुतिन के युद्ध, किसी पड़ोसी देश पर हमला करने, संप्रभुता का उल्लंघन करने, सभी मानदंडों का उल्लंघन करने की अनुमति देते हैं ... यदि आप बिना किसी परिणाम के ऐसा होने देते हैं, तो हमें भविष्य में परेशानी होगी।"

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में ऐसे कई देश हैं जिनके सीमा विवाद हैं और पड़ोसियों के साथ किसी तरह की परेशानी है। मैं इस बारे में विवरण में नहीं जा रहा हूं कि यह भारत के लिए कौन हो सकता है। तथ्य यह है कि अगर इसकी अनुमति है, तो अगला कौन है।’’

लिंडनर ने कहा कि अगर रूस को नहीं रोका गया तो ‘‘भविष्य का हर हमलावर कहेगा कि हमने सिर्फ पुतिन के उदाहरण का अनुसरण किया।’’

उन्होंने कहा, "यह कहने का समय है कि दुनिया में हर कोई रूस को रोक सकता है, जिसका पुतिन पर कोई प्रभाव है।"

राजदूत ने कहा कि दुनिया के हर देश को आक्रमण के परिणामों के बारे में पता होना चाहिए और इस तरह के व्यवहार को माफ नहीं किया जाना चाहिए।

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