देश की खबरें | दिल्ली: अदालत ने मानहानि मामले में भाजपा नेता तेजिंदर बग्गा से स्वामी की याचिका पर जवाब मांगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा से पार्टी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा से पार्टी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।

स्वामी को आपराधिक मानहानि मामले में तलब किया गया था।

न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने बग्गा को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया, जिसमें उनके मामले पर विचार करने के लिए प्रमुख बिंदु भी शामिल करने को कहा गया।

अदालत ने स्वामी को बग्गा के जवाब पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और सुनवाई 26 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी।

बग्गा द्वारा दायर मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट अदालत ने स्वामी को समन जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए वरिष्ठ नेता ने उच्च न्यायालय का रुख किया और मामले की कार्यवाही को रद्द करने का अनुरोध किया।

उच्च न्यायालय ने चार अप्रैल, 2022 को मामले में अधीनस्थ न्यायालय की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

स्वामी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बुधवार को बताया कि बग्गा ने अब तक मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।

बग्गा के वकील ने इसके बारे में पूछे जाने पर बताया कि स्वामी को पहले अपनी याचिका की स्वीकार्यता के मुद्दे पर दलीलें पेश करनी थीं, जिसका निर्देश उच्च न्यायालय ने पूर्व में दिया था।

न्यायमूर्ति डुडेजा ने हालांकि कहा, “आपको (बग्गा को) कम से कम अपना जवाब दाखिल करना चाहिए और इसमें स्वीकार्यता के मुद्दे पर अपनी दलीलें भी पेश करनी चाहिए।”

मजिस्ट्रेट ने 22 मार्च, 2022 को पूर्व राज्यसभा सदस्य को मानहानि मामले में आरोपी के तौर पर तलब किया था और कहा था कि उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार है।

बग्गा ने सितंबर 2021 में आरोप लगाया था कि स्वामी ने एक ट्वीट में झूठा दावा किया था कि भाजपा में शामिल होने से पहले उन्हें (बग्गा को) नयी दिल्ली मंदिर मार्ग थाने द्वारा छोटे-मोटे अपराधों के लिए कई बार जेल भेजा गया था।

स्वामी के वकील ने दलील दी थी कि अधीनस्थ अदालत का आदेश गलत था क्योंकि उनके ट्वीट को गलत तरीके से पेश किया गया था।

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