देश की खबरें | दिल्ली दंगे: उच्च न्यायालय ने निचली अदालत से शाहरुख पठान की याचिका पर विचार करने को कहा

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नयी दिल्ली, 24 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को निचली अदालत से शाहरुख पठान की नयी जमानत याचिका पर एक महीने के भीतर फैसला करने को कहा। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के सिलसिले में अखबारों में प्रकाशित तस्वीरों में वह एक पुलिसकर्मी पर पिस्तौल ताने दिखा था।

पठान के वकील ने उच्च न्यायालय से अपनी लंबित जमानत याचिका वापस लेने और राहत पाने के लिए निचली अदालत का रुख करने की अनुमति देने का अनुरोध किया क्योंकि स्थिति में काफी बदलाव आ गया है।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा को आरोपी के वकील ने सूचित किया कि उसकी जमानत याचिका जनवरी 2022 से उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। उन्होंने उच्च न्यायालय से निचली अदालत को पठान की जमानत याचिका पर सुनवाई करने और शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश देने का आग्रह किया।

उच्च न्यायालय ने आरोपी को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा, ‘‘निचली अदालत एक महीने के भीतर जमानत याचिका का निस्तारण करे।’’

आरोपी के वकील ने कहा कि नयी जमानत याचिका की आवश्यकता है क्योंकि परिस्थितियों में बदलाव आ गया है और उसकी पिछली जमानत याचिका खारिज होने के बाद अभियोजन पक्ष के कुछ महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ हो चुकी है।

सुनवाई के दौरान, पठान के वकील ने दावा किया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों द्वारा जिन आरोपियों की पहचान की गई थी और जिनके नाम बताए गए थे, उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि वह अभी भी जेल में है। उन्होंने दावा किया कि पठान के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है और वह लगभग साढ़े तीन साल से जेल में बंद है।

अभियोजक ने जमानत याचिका का विरोध किया और जेल में आरोपी के आचरण की ओर अदालत का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने दलील दी, ‘‘आरोपी का आचरण बिल्कुल स्पष्ट है। उसकी कोठरी से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। उसने सहायक जेल अधीक्षक पर हमला किया। अपराध के बाद वह फरार हो गया था और बाद में तीन मार्च, 2020 को उसे गिरफ्तार किया गया।’’

पुलिस ने पूर्व में उच्च न्यायालय के समक्ष एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि पुलिस और ऐसे गवाह हैं, जिन्होंने पठान की पहचान की है। रिपोर्ट में कहा गया कि पठान की आपराधिक पारिवारिक पृष्ठभूमि और उसके गुस्सैल स्वभाव से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह गवाहों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि पठान एक भीड़ का नेतृत्व कर रहा था और 24 फरवरी, 2020 को दंगे के कृत्य में शामिल था, जिसके दौरान उसने अपनी पिस्तौल से शिकायतकर्ता और लोगों पर गोलियां चलाईं।

दिसंबर 2021 में एक निचली अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद पठान ने उच्च न्यायालय का रुख किया।

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थकों और इसका विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होने के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें भड़क उठी थीं, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।

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