देश की खबरें | इराकी नागरिक के पैर को बचाने के लिये दिल्ली के अस्पताल ने अपनाई 19वीं सदी की प्रक्रिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शहर के एक अस्पताल के डॉक्टरों ने ‘क्रॉस लेग फ्लैप सर्जरी’ का उपयोग कर 40 वर्षीय इराकी नागरिक का इलाज किया। खास बात यह है कि चिकित्सकों ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया वह एक सदी से अधिक पुरानी है।

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर शहर के एक अस्पताल के डॉक्टरों ने ‘क्रॉस लेग फ्लैप सर्जरी’ का उपयोग कर 40 वर्षीय इराकी नागरिक का इलाज किया। खास बात यह है कि चिकित्सकों ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया वह एक सदी से अधिक पुरानी है।

इस प्रक्रिया के तहत शरीर के प्रभावित हिस्से पर दूसरे हिस्से की त्वचा को रखा जाता है जिससे प्रभावित हिस्से पर भी नई त्वचा बन जाती है और बाद में उन्हें पूर्व स्थिति में कर दिया जाता है। इस दौरान रक्त की आपूर्ति बरकरार रखी जाती है।

यह ऑपरेशन फोर्टिस अस्पताल, वसंतकुंज में किया गया। अस्पताल ने कहा कि चिकित्सकों ने इस पुरानी पद्धति से उपचार करने का फैसला किया, क्योंकि नई और ज्यादा परिष्कृत प्रक्रियाओं को अपनाना मरीज की अस्थिर हालत को देखते हुए संभव नहीं था।

‘क्रॉस लेग फ्लैप सर्जरी’ की तकनीक का चिकित्सा साहित्य में पहला विवरण 1854 में मिलता है। उन दिनों शरीर के निचले हिस्से के नरम ऊतकों के पुनर्निर्माण के लिए इसे ‘स्वर्ण मानक’ माना जाता था।

अस्पताल ने कहा कि यह तकनीक हालांकि अत्यधिक परिष्कृत माइक्रोवैस्कुलर तकनीकों के आगमन के साथ अनुपयोगी हो गई, जो डॉक्टरों को क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं या नसों को जोड़ने या उनकी मरम्मत करने में सक्षम बनाती है।

अस्पताल ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल पीड़ित की इराक में आठ महीनों के दौरान तीन असफल सर्जरी हो चुकी थीं। उसने बताया कि मरीज को जब अस्पताल लाया गया था तो उसके बाएं घुटने का जोड़ अपनी जगह से हिला हुआ था और गंभीर रूप से संक्रमित होने के कारण उसके पैर से पस भी निकल रहा था।

जांच से पता चला कि रोगी के प्रभावित पैर में कई चोटों के कारण कोई रक्त वाहिका सलामत नहीं थी, जिसका होना वर्तमान में प्रचलित पुनर्निर्माण सर्जरी के लिए जरूरी है। इसके बाद डॉक्टरों ने ‘क्रॉस लेग फ्लैप सर्जरी’ करने का फैसला किया।

फोर्टिस, वसंत कुंज में ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के निदेशक डॉ. धनंजय गुप्ता ने कहा, “काफी विचार विमर्श के बाद हमनें जटिल व कई चरणों वाली प्रक्रिया को अपनाने का फैसला किया। यद्यपि उपचार की प्रक्रिया पांच हफ्तों तक चली लेकिन उसका नतीजा संतोषजनक है।”

उन्होंने कहा, “फिलहाल, मरीज का पैर नर्म उत्तक से ढका हुआ है और संक्रमण के कोई निशान नहीं हैं।”

गुप्ता ने कहा कि मरीज से चलना शुरू करने के लिये कहा गया है और फिलहाल उसकी फीजियो थेरेपी चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तीन महीनों में वह अपने पैर पर पूरा वजन डाल सकेगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\