देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने एस गुरुमूर्ति का माफीनामा स्वीकार किया, अवमानना मामले से आरोप-मुक्त किया
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नयी दिल्ली, 13 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2018 के एक अवमानना मामले में चेन्नई से प्रकाशित एक तमिल समाचार पत्रिका के संपादक एस गुरुमूर्ति का माफीनामा स्वीकार करते हुए बृहस्पतिवार को उन्हें आरोप-मुक्त कर दिया।
गुरुमूर्ति ने एक न्यायाधीश के खिलाफ किये गये अपने ट्वीट के लिए माफीनामा दिया और ‘गहरा पछतावा’ व्यक्त किया। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने गुरुमूर्ति के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) की ओर से दायर अवमानना मामला बंद कर दिया।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति गौरांग कांत की पीठ ने कहा, “…तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद, हम संबंधित घटना के लिए एस गुरुमूर्ति का माफीनाम स्वीकार करते हैं और वर्तमान अवमानना याचिका में उन्हें जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ से आरोप-मुक्त करना उचित मानते हैं। पीठ ने कहा कि तदनुसार, उन्हें आरोप-मुक्त किया जाता है।
डीएचसीबीए का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि गुरुमूर्ति की ओर से दिये गये माफीनामे और अपने किसी भी कृत्य के लिए पछतावे का भाव व्यक्त किये जाने तथा न्यायपालिका के प्रति सर्वाधिक सम्मान संबंधी उनके बयान के मद्देनजर आरोप-मुक्त करने की उनकी दलील मंजूर कर ली जानी चाहिए।
अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि गुरुमूर्ति पहले भी स्वेच्छा से उसके सामने पेश हुए थे और पश्चाताप व्यक्त किया था।
न्यायमूर्ति मृदुल ने मौखिक टिप्पणी की, ‘‘कभी-कभी इलाज बीमारी से भी बदतर होता है। पूरे विवाद में एक माननीय न्यायाधीश का नाम अनावश्यक रूप से घसीटने की खबरें लगातार आती रहती हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आपको लगता है कि (क्या) हम अपनी गरिमा के लिए अखबारों की खबरों और ट्वीट पर भरोसा करते हैं? जैसा कि हमने पहले भी कई निर्णयों में कहा है, गरिमा एक निश्चित स्तर पर टिकी होती है। हम अपनी गरिमा के लिए निष्पक्ष या अनुचित आलोचना पर निर्भर नहीं हैं।’’
गुरुमूर्ति द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मुरलीधर के खिलाफ कुछ ट्वीट पोस्ट करने के बाद डीएचसीबीए ने 2018 में अवमानना याचिका दायर की थी।
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