देश की खबरें | दिल्ली की अदालत ने दंगा मामले में आप विधायक अमानतुल्लाह खान को बरी किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने मई 2022 में दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे तोड़-फोड़ अभियान के विरोध के दौरान कथित तौर पर दंगा करने और पुलिसकर्मियों पर पथराव करने के एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान को बुधवार को बरी कर दिया।

नयी दिल्ली, एक मार्च दिल्ली की एक अदालत ने मई 2022 में दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे तोड़-फोड़ अभियान के विरोध के दौरान कथित तौर पर दंगा करने और पुलिसकर्मियों पर पथराव करने के एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान को बुधवार को बरी कर दिया।

विशेष न्यायाधीश विकास ढुल ने मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के खिलाफ खान द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश सुनाया।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने खान और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147 (दंगा करना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 186 (लोक सेवक के सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना), 353 (लोक सेवा को अपना कर्तव्य करने से रोकने के लिए हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना) और 332 (लोक सेवक को रोकने के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।

सत्र अदालत ने बुधवार को कहा कि मजिस्ट्रेट की अदालत का आदेश ‘‘पूरी तरह से अवैध’’ है और कानून की नजर में उचित नहीं है।

न्यायाधीश ने कहा कि मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस प्रथमदृष्टया राय पर पहुंचने के लिए गवाहों के बयानों को अत्यधिक महत्व दिया कि याचिकाकर्ता और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की आवश्यकता है, जबकि वीडियो रिकॉर्डिंग गवाहों के आरोपों का समर्थन नहीं करती।

सत्र अदालत ने कहा कि दो संभावित विचार हैं, जिनमें से एक गवाहों के बयानों पर निर्भर है और यह इस बात का केवल संदेह पैदा करता है कि याचिकाकर्ता और अन्य आरोपियों ने कथित अपराध किए, जबकि दूसरा विचार वीडियो रिकॉर्डिंग पर आधारित है, जो आरोपियों के खिलाफ कोई गंभीर संदेह पैदा नहीं करता।

न्यायाधीश ने खान को बरी करते हुए कहा, ‘‘यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि यदि दो संभावित विचार हैं और एक दृष्टिकोण केवल संदेह पैदा करता है, तो अभियुक्त को आरोप मुक्त किया जाना चाहिए। उपरोक्त चर्चा के आलोक में यह (मजिस्ट्रेट की अदालत का) आदेश पूरी तरह से अवैध है और कानून में नजर में टिकने योग्य नहीं है।’’

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने खान और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का 20 जनवरी को आदेश दिया था।

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