देश की खबरें | दिल्ली एम्स ने रेजिडेंट डॉक्टरों को अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करने को लेकर किया आगाह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली ने अपने प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टरों को अस्पताल परिसर में या उसके आस-पास किसी भी प्रकार का प्रदर्शन करने के खिलाफ चेतावनी दी है।
नयी दिल्ली, 13 अगस्त अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली ने अपने प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टरों को अस्पताल परिसर में या उसके आस-पास किसी भी प्रकार का प्रदर्शन करने के खिलाफ चेतावनी दी है।
एम्स ने कहा है कि यह दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है और अदालत की अवमानना है।
एम्स-दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की घटना के विरोध में सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।
डॉक्टरों की हड़ताल के कारण बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) और वार्ड सहित सभी वैकल्पिक और गैर-आवश्यक सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है।
एम्स प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों और केंद्र प्रमुखों को प्रतिदिन अपराह्न तीन बजे तक रेजिडेंट डॉक्टरों की उपस्थिति भेजने को कहा है।
प्रशासन ने सोमवार को एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर सभी रेजिडेंट डॉक्टरों का ध्यान 2002 में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा निर्धारित आचार संहिता की ओर आकर्षित किया।
एम्स प्रशासन ने कार्यालय ज्ञापन में कहा है कि यदि किसी व्यक्ति/छात्र/कर्मचारी/कर्मचारियों के समूह, छात्र/रेजिडेंट डॉक्टर/एसोसिएशन/यूनियन आदि द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया जाता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और साथ ही अदालत की अवमानना का भी मामला दर्ज किया जाएगा।
इसमें एम्स से जुड़े किसी भी अन्य संकाय, रेजीडेंट, प्रशिक्षु, छात्र, पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा हड़ताल, विरोध या प्रदर्शन के संबंध में 21 फरवरी, 2011 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला दिया गया।
एम्स प्रशासन ने कार्यालय ज्ञापन में उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा, ‘‘एम्स के प्राधिकारियों के लिए यह देखना अनिवार्य है कि संस्थान से जुड़ा कोई भी व्यक्ति हड़ताल, विरोध या प्रदर्शन का सहारा लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न दिखाए और जो व्यक्ति ऐसी गतिविधि में शामिल होगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और इस न्यायालय की अवमानना भी की जाएगी।’’
अस्पताल प्रशासन ने कहा, ‘‘उक्त आचार संहिता को एक बार फिर संस्थान के रेजिडेंट डॉक्टरों, चाहे वे किसी भी ग्रेड और कैडर के हों, तथा उनका प्रतिनिधित्व करने वाली विभिन्न यूनियनों/एसोसिएशनों की जानकारी तथा अनुपालन के लिए अधिसूचित किया जा रहा है, ताकि परिसर में शांति और सद्भाव बनाए रखा जा सके और संस्थान का सुचारू रूप से संचालन हो सके।’’
आचार संहिता के अनुसार, कोई भी स्टाफ या संकाय सदस्य किसी भी कारण से शैक्षणिक गतिविधियों को बंद नहीं करेगा या काम में बाधा नहीं डालेगा या व्यवधान अथवा समाप्ति में सहायता नहीं करेगा या उसे बढ़ावा नहीं देगा और परिसर के भीतर लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए या नारे नहीं लगाने चाहिए, प्रदर्शन या धरना नहीं दिया जाना चाहिए।
संस्थान की सीमा से 500 मीटर की परिधि के भीतर किसी भी प्रकार की बैठक या विरोध सभा आयोजित नहीं की जाएगी और किसी भी सरकारी कार्य में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा तथा सभी ट्रेड यूनियन गतिविधियां परिसर के बाहर की जाएंगी।
कार्यालय ज्ञापन में सुरजीत सिंह बनाम पंजाब एवं अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
एम्स प्रशासन ने कार्यालय ज्ञापन में कहा, ‘‘ उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, एम्स में या उसके आसपास हड़ताल, धरना या प्रदर्शन या घेराव जैसी कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए।’’
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार हॉल में गत शुक्रवार को एक महिला चिकित्सक का शव अर्ध नग्न अवस्था में मिला था। परिजनों का आरोप है कि महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। वारदात के सिलसिले में शनिवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था, जो अस्पताल से जुड़ा हुआ नहीं था, लेकिन उसका वहां अक्सर आना-जाना था।
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