देश की खबरें | आरोप पत्र में मजबूत मामला बनने पर ‘डिफॉल्ट’ जमानत को रद्द किया जा सकता है : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को व्यवस्था दी कि अगर जांच के निष्कर्ष पर आरोप पत्र दाखिल करने पर एक मजबूत मामला बनता है और इसके “विशेष कारण” हैं, तो किसी आरोपी को दी गई ‘डिफॉल्ट’ जमानत को गुण-दोष के आधार पर रद्द किया जा सकता है।

नयी दिल्ली, 16 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को व्यवस्था दी कि अगर जांच के निष्कर्ष पर आरोप पत्र दाखिल करने पर एक मजबूत मामला बनता है और इसके “विशेष कारण” हैं, तो किसी आरोपी को दी गई ‘डिफॉल्ट’ जमानत को गुण-दोष के आधार पर रद्द किया जा सकता है।

न्यायालय ने इस दलील को खारिज कर दिया कि एक आरोपी के “डिफॉल्ट” जमानत पर रिहा होने के बाद गुण-दोष के आधार पर जमानत रद्द नहीं की जा सकती। न्यायालय ने कहा कि अगर तर्क स्वीकार किया जाता है तो यह सुस्त जांच को “बढ़ावा” देगा और न्याय को विफल कर देगा।

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने कहा कि केवल आरोप पत्र दाखिल करने से ‘डिफॉल्ट’ जमानत रद्द नहीं होती। उसने कहा कि ऐसा तभी होता है, जब अदालत इस बात से संतुष्ट हो कि आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती अपराध को लेकर मजबूत मामला बनता है।

पीठ ने कहा, “दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167 (2) के तहत “डिफॉल्ट” जमानत पर रिहा होने के बाद आरोप पत्र दाखिल करना किसी व्यक्ति की जमानत को रद्द करने का आधार नहीं हो सकता है, जिसे डिफॉल्ट जमानत पर रिहा किया गया है।”

न्यायालय ने कहा, हालांकि, जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र दाखिल करने पर, यदि एक मजबूत मामला बनता है और गुण-दोष के आधार पर यह पाया जाता है कि उसने गैर-जमानती कृत्य/अपराध किया है तो विशेष कारणों/आधारों पर और सीआरपीसी की धारा 437 (5) और धारा 439(2) पर विचार करने के बाद गुण-दोष के आधार पर जमानत पर रिहा व्यक्ति की जमानत रद्द की जा सकती है।

सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत, एक अभियुक्त वैधानिक जमानत पाने का हकदार हो जाता है यदि जांच एजेंसी 60 या 90 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर सुनवाई अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने में विफल रहती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत एक बार किसी व्यक्ति को डिफॉल्ट जमानत पर रिहा करने के बाद उसकी जमानत रद्द नहीं की जा सकती है, ऐसा कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई एस विवेकानंद रेड्डी की हत्या के मामले में एरा गंगी रेड्डी की जमानत रद्द करने की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर तेलंगाना उच्च न्यायालय को गुण-दोष के आधार पर विचार करने का निर्देश देते हुए यह टिप्पणी की।

आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी के छोटे भाई और मौजूदा मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की 15 मार्च 2019 को पुलिवेंदुला स्थित उनके आवास पर हत्या कर दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने मामले को हैदराबाद में तेलंगाना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया और उसे योग्यता के आधार पर और की गई टिप्पणियों के आलोक में जमानत रद्द करने के लिए आवेदन पर विचार करने, निर्णय लेने और उसे निपटाने का निर्देश दिया।

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