देश की खबरें | केंद्र के फैसलों से भाजपा में जगी आस, बेरोजगारी के मुद्दे पर कुंद होगी विपक्षी हथियार की धार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों को ‘‘मिशन मोड’’ में काम करते हुये अगले डेढ़ साल में 10 लाख लोगों की भर्ती किए जाने के निर्देश से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्षी हथियार की धार कुंद करने का अवसर मिल गया है।

नयी दिल्ली, 14 जून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों को ‘‘मिशन मोड’’ में काम करते हुये अगले डेढ़ साल में 10 लाख लोगों की भर्ती किए जाने के निर्देश से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्षी हथियार की धार कुंद करने का अवसर मिल गया है।

सरकार द्वारा सशस्त्र बलों में सैनिक के रूप में युवाओं की अल्पकालिक भर्ती संबंधी ‘‘अग्निपथ योजना’’ की घोषणा भी इस मुद्दे पर भाजपा के तरकश में तीर की तरह काम करेगी। इस योजना के तहत पहली बार में 46,000 लोगों को समाहित किए जाने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ये 46,000 नौकरियां कुल 10 लाख नयी नौकरियों संबंधी प्रधानमंत्री के निर्देश का हिस्सा होंगी।

भाजपा के नेताओं ने जहां इस फैसले की सराहना करते हुए इसे ‘‘क्रांतिकारी’’ बताया वहीं विपक्षी दलों ने इसे ‘‘जुमलेबाजी’’ करार देते हुए याद दिलाया कि भाजपा ने तो हर साल दो करोड़ रोजगार दिए जाने का वादा किया था।

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक मोदी ने सभी सरकारी विभागों एवं मंत्रालयों में मानव संसाधन की स्थिति की समीक्षा करने के बाद यह निर्देश जारी किया।

बेरोजगारी के मसले पर विपक्ष की ओर से सरकार की लगातार की जा रही आलोचना के बीच प्रधानमंत्री का यह फैसला आया है। विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में खाली पड़े पदों का मुद्दा भी पिछले कुछ समय से सुर्खियों में रहा है।

अगले 18 महीनों में 10 लाख पदों को भरे जाने का मतलब है कि केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास 2024 के आगामी लोकसभा चुनाव में बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष की हर आलोचना की काट के लिए एक ठोस जवाब रहेगा।

लोकसभा का अगला चुनाव वर्ष 2024 के अप्रैल-मई महीने में होने की संभावना है।

पिछले विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों ने बेरोजगारी के मुद्दे को जोरशोर से उठाया था लेकिन भाजपा ने कल्याणकारी योजनाओं और विकास के साथ हिन्दुत्व के मुद्दों को आगे रखते हुए विपक्षी आक्रमण की धार कुंद कर दी थी और सफलता हासिल की थी।

बेरोजगारी के मुद्दे पर भाजपा विपक्ष के आरोपों को लगातार यह कहकर भी खारिज करती रही है कि सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों से देश में उद्यमिता और रोजगार निर्माण को बढ़ावा मिला है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार द्वारा जिस बड़े स्तर पर रोजगार संबंधी घोषणाएं की गईं, वह इस बात का द्योतक है कि उसने इस बात को माना कि समाज के एक बड़े वर्ग, खासकर युवाओं में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है और समय रहते इस पर उचित कदम नहीं उठाए गए तो आगामी लोकसभा चुनाव में इससे विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा हाथ लग जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगले डेढ़ साल में सभी सरकारी विभागों में ‘मिशन मोड’ पर 10 लाख भर्तियां करने का प्रधानमंत्री मोदी का निर्देश युवाओं में नयी उम्मीद और विश्वास लेकर आएगा।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के उन युवाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं जो नए भारत के आधार हैं। शाह ने ट्वीट किया, ‘‘नए भारत का आधार इसकी युवा शक्ति है, उन्हें सशक्त बनाने के लिए मोदी लगातार काम कर रहे हैं। 1.5 साल में सभी सरकारी विभागों और मंत्रालयों में ‘मिशन मोड’ में 10 लाख भर्तियां करने का श्री मोदी का निर्देश युवाओं में नयी उम्मीद और विश्वास लाएगा।’’

इस घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘अगले डेढ़ वर्षों में विभिन्न सरकारी मंत्रालयों और विभागों में 10 लाख लोगों की भर्ती के इस नए मिशन के लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के फैसले दर्शाते हैं कि उनकी सरकार का जोर युवाओं के लिए रोजगार निर्माण पर है और उसका ध्यान काम के बोझ के प्रभावी प्रबंधन पर है।

हालांकि, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस फैसले के मद्देनजर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह जुमलों की नहीं, बल्कि ‘महा जुमलों’ की सरकार है। उन्होंने यह दावा भी किया कि जैसे हर साल दो करोड़ नौकरियों का ‘झांसा’ दिया गया, उसी तरह अब 10 लाख सरकारी नौकरियों की बारी है।

कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, ‘‘जैसे 8 साल पहले युवाओं को हर साल 2 करोड़ नौकरियों का झांसा दिया था, वैसे ही अब 10 लाख सरकारी नौकरियों की बारी है। ये जुमलों की नहीं, 'महा जुमलों' की सरकार है।’’

राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘प्रधानमंत्री जी नौकरियां बनाने में नहीं, नौकरियों पर 'न्यूज' बनाने में एक्सपर्ट (विशेषज्ञ) हैं।’’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने एक ट्वीट में कहा कि करोड़ों की संख्या में रोजगार देने के अपने वादे में पूरी तरह विफल साबित होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी यह घोषणा कर रिकार्ड बेरोजगारी के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग द्वारा वेतन व भत्तों पर जारी ताजा वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के कुल नियमित सिविल कर्मचारियों (केंद्र शासित प्रदेशों सहित) की संख्या एक मार्च 2020 की अवधि तक 31.91 लाख थी जबकि स्वीकृत पदों की कुल संख्या 40.78 लाख थी। इस हिसाब से करीब 21.75 प्रतिशत पद रिक्त थे।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल श्रम शक्ति का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा पांच प्रमुख मंत्रालयों या विभागों के अंतर्गत आता है, इनमें रेलवे, रक्षा (सिविल), गृह , डाक और राजस्व शामिल हैं।

कुल 31.33 लाख पदों की निधार्रित संख्या (संघ शासित प्रदेशों को छोड़कर) में रेलवे की हिस्सेदारी 40.55 प्रतिशत, गृह मामलों की 30.5 प्रतिशत, रक्षा (सिविल) की 12.31 प्रतिशत, डाक की 5.66 प्रतिशत, राजस्व की 3.26 प्रतिशत और अन्य मंत्रालयों व विभागों की 7.72 प्रतिशत है।

संघ शासित प्रदेशों और दूतावासों सहित केंद्र सरकार के नियमित सिविल कर्मचारियों के वेतन व भत्तों पर कुल खर्च (प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस या तदर्थ बोनस, मानदेय, अर्जित छुट्टियों का नकदीकरण और यात्रा भत्ता छोड़कर) वर्ष 2019-20 में 2,25,744.7 करोड़ रुपये था जबकि मार्च 2018-19 में यह आंकड़ा 2,08,960.17 करोड़ रुपये था।

इस रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सुरक्षा बलों में कुल स्वीकृत पदों 10.16 लाख के मुकाबले मार्च 2020 में 9.05 लाख कर्मचारी थे।

अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि बेरोजगारी दर मई में कम होकर 7.12 फीसदी रह गई है। अप्रैल में यह 7.83 फीसदी थी। मई में 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने से बेरोजगारी दर में गिरावट आई है। देश में कुल रोजगार की संख्या बढ़कर 40 करोड़ से अधिक पहुंच गई है।

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