तिरुवनंतपुरम, पांच मई केरल में टीका लगवाने के बावजूद लगातार तीन बच्चों की रेबीज संक्रमण से मौत ने राज्य में आवारा कुत्तों के खतरे की समस्या को लेकर बहस को एक बार फिर से जन्म दिया है। वहीं, विपक्ष ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा दल (एलडीएफ) सरकार पर इस मामले में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
पड़ोसी कोल्लम जिले के कुन्नीकोड की मूल निवासी सात वर्षीय निया फैजल की सोमवार तड़के यहां एक सरकारी अस्पताल में मौत हो गई।
फैजल में रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने के बाद वह पिछले कुछ दिनों से यहां श्री अवित्तम थिरुनल (एसएटी) अस्पताल में कृत्रिम जीवनरक्षक प्रणाली पर थी।
कांग्रेस नीत यूडीएफ ने इस घटना को ‘‘अत्यंत गंभीर’’ बताया और आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही के कारण उसकी मौत हुई।
स्थानीय स्वशासन राज्य मंत्री एम बी राजेश ने केंद्र पर निशाना साधते हुए उसके पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) मानदंडों को दोषी ठहराया।
उन्होंने कहा कि केंद्र के अव्यावहारिक एबीसी नियम और स्थानीय लोगों द्वारा अपने क्षेत्रों में एबीसी केंद्रों की स्थापना के खिलाफ कड़े विरोध के कारण राज्य में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है।
राज्य में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि यह बेहद गंभीर बात है कि एक बच्ची को टीके की तीन खुराक दिए जाने के बावजूद उसे रेबीज हो गया।
उन्होंने कहा कि राज्य में आवारा कुत्तों के हमले के बाद इलाज के दौरान टीके लगने के बावजूद पिछले एक महीने में रेबीज संक्रमण के कारण यह तीसरी मौत हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती और इस संबंध में तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
सतीशन ने कहा, ‘‘पिछले पांच वर्षों में राज्य में रेबीज से मरने वाले 102 लोगों में से 20 की मौत टीके लगने के बावजूद हुई है।’’
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बावजूद स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि टीका ठीक है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बच्चों को सरकारी कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का बलि का बकरा बनाना अस्वीकार्य है।
विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘सरकार को यह याद रखना चाहिए कि वह छोटे बच्चों की मौत की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।’’
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