देश की खबरें | दाभोलकर हत्याकांड : तीन आरोपियों को बरी करने के खिलाफ परिवार ने उच्च न्यायालय का किया रुख

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मुंबई, 21 अगस्त तर्कवादी नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या के मामले में तीन आरोपियों को अधीनस्थ अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले को सामाजिक कार्यकर्ता के परिवार ने बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर ने अपील दायर कर उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसके तहत मामले में दोषी ठहराए गए दो अन्य आरोपियों को आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी कृत्य के अपराध से बरी कर दिया गया है।

मुक्ता दाभोलकर ने अधिवक्ता अभय नेवागी के माध्यम से दायर अपील में कहा कि उनके पिता की हत्या एक ‘‘सुनियोजित हत्या थी और इसमें एक बड़ी साजिश थी।’’

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई की और सभी आरोपियों और अभियोजन एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।

मुक्ता ने याचिका में कहा कि सत्र न्यायालय इस तथ्य को संज्ञान में लेने में विफल रही कि मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति दक्षिणपंथी समूह सनातन संस्था के सदस्य थे और यहां तक ​​कि तीन बरी किए गए व्यक्ति भी संगठन से जुड़े थे।

अपील में आरोप लगाया गया है, ‘‘आरोपियों ने डॉ. नरेंद्र दाभोलकर को खत्म करने के लिए यह साजिश रची, जो सनातन संस्था, हिंदू जन जागरण समिति और अन्य ऐसे संगठनों के खिलाफ अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।’’

अपील में वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को बरी करने के सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।

अपील में कहा गया कि दो अन्य आरोपियों सचिन अंदुरे और शरद कालस्कर को भारतीय दंड संहिता की धारा 16 (आतंकी कृत्य) और शस्त्र अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया।

महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक दाभोलकर (67) की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान कथित तौर पर सनातन संस्था से जुड़े दो लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पुणे की एक सत्र अदालत ने 10 मई 2024 को अंदुरे और कालस्कर (शूटर) को हत्या के आरोप में दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी जबकि बाकी तीन आरोपियों को बरी कर दिया।

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