देश की खबरें | सीयूईटी ‘कोचिंग संस्कृति’ को बढ़ावा दे सकता है: निजी स्कूलों का संगठन

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नयी दिल्ली, 24 मार्च निजी स्कूलों के एक संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर शैक्षणिक सत्र 2022-23 से समान विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) लागू करने पर छात्रों में ‘कोचिंग संस्कृति’ को बढ़ावा देने की आशंका व्यक्त की है।

केंद्रीय अनुदान आयोग (यूजीसी) प्रमुख एम जगदीश कुमार ने सोमवार को ऐलान किया था कि केंद्रीय विद्यालय इस साल से स्नातक पूर्व (यूजी) कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को दाखिला देने के लिए सीयूईटी अंकों का इस्तेमाल करेंगे न कि 12वीं कक्षाएं में मिले अंकों के आधार पर प्रवेश देंगे।

कुमार ने कहा कि सीयूईटी का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी के कक्षा 12वीं के मॉडल के मुताबिक होगा।

अखिल भारतीय एवं विदेश में उच्च माध्यमिक स्कूल प्रधानाचार्यों के संगठन ‘नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस’ (एनपीएससी) ने हालांकि सीयूईटी लाने के कदम का स्वागत किया है और कहा कि यह विद्यार्थियों में कई प्रवेश परीक्षाएं देने के तनाव को खत्म करेगा, मगर उसने कुछ चिंताएं भी व्यक्त की हैं जिनमें इसके कोचिंग संस्कृति को बढ़ावा देने की आशंका भी शामिल है।

एनपीएससी ने स्कूली शिक्षा से संबंधित सभी हितधारकों के साथ "व्यापक परामर्श प्रक्रिया" का आह्वान किया।

बृहस्पतिवार को लिखी चिट्ठी में कहा गया है, “ सीयूईटी लाने का एक उद्देश्य कुछ राज्य बोर्डों के छात्रों द्वारा हासिल किए जाने वाले उच्च कट-ऑफ अंकों से निपटना है जबकि इस समस्या का समाधान उन्हें सीबीएसई के साथ समानता में लाने के लिए एक युक्तिकरण संरचना तैयार करके अलग तरीके से किया जा सकता है।”

इसने यह भी कहा कि छात्र फिलहाल सीबीएसई के दूसरे ‘टर्म’ की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और सीयूईटी में बैठने की संभावना उनके लिए तनावपूर्ण हो सकती है।

पत्र के मुताबिक, “ हमें लगता है कि सीयूईटी को अगले वर्ष से लागू किया जा सकता है ताकि उन विद्यार्थियों में इसे लेकर व्यापक जागरूकता फैलाई जा सके जिनके पास अंतिम बोर्ड की परीक्षा देने के बाद इस तरह की समान प्रवेश परीक्षा देने के वास्ते खुद को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए पर्याप्त समय होगा। ”

एनपीएससी की प्रमुख सुधा आचार्य ने कहा कि सीयूईटी एनसीईआरटी की किताबों पर आधारित होगा और इस वजह से राज्य बोर्डों और आईसीएसई के छात्रों को कोचिंग लेनी पड़ेगी क्योंकि वे अलग-अलग किताबों से उन्हें पढ़ातें हैं।

उन्होंने पत्र में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कोचिंग संस्कृति को दूर करने की कल्पना की गई है और कक्षा 12वीं में प्राप्त अंकों को कोई ‘वेटेज’ नहीं देने से कोचिंग संस्कृति में बढ़ावा मिलेगा।

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