देश की खबरें | दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर अदालत ने ईडी से जवाब मांगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शराब कंपनी पर्नोड रिकार्ड के अधिकारी बिनॉय बाबू द्वारा दायर जमानत याचिका पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा। बाबू को दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था।
नयी दिल्ली, 22 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने शराब कंपनी पर्नोड रिकार्ड के अधिकारी बिनॉय बाबू द्वारा दायर जमानत याचिका पर बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा। बाबू को दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने निचली अदालत के 16 फरवरी के उस आदेश को चुनौती देने संबंधी बाबू की याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
निचली अदालत ने बाबू के अलावा आरोपी व्यवसायी विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, समीर महेंद्रू और अरबिंदो फार्मा के प्रवर्तक शरथ पी रेड्डी को भी जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उन्हें जमानत देने के लिए उचित आधार नहीं है।
निचली अदालत ने कहा था कि कथित अपराध में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका और अवैध धन के पूरे लेनदेन का पता लगाने सहित विस्तृत जांच अभी भी लंबित है।
गौरतलब है कि ईडी ने बाबू को पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया था।
धनशोधन का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी से उत्पन्न हुआ है। इस मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आबकारी विभाग के अन्य अधिकारियों को सीबीआई तथा ईडी की प्राथमिकियों में आरोपी के रूप में नामजद किया गया था।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि नायर ने अन्य सह-आरोपी और शराब निर्माताओं के साथ-साथ वितरकों से हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली के विभिन्न होटलों में ‘‘हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से अवैध धन की व्यवस्था’’ करने के लिए मुलाकात की थी।
यह भी दावा किया गया है कि बोइनपल्ली बैठकों का हिस्सा थे और एक अन्य आरोपी शराब व्यवसायी समीर महेंद्रू के साथ धनशोधन की साजिश में शामिल थे।
मामले के अन्य आरोपी दिल्ली के उपमुख्यमंत्री सिसोदिया, पूर्व आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्ण, आबकारी विभाग के पूर्व उपायुक्त आनंद तिवारी और पूर्व सहायक आयुक्त पंकज भटनागर हैं।
सीबीआई और ईडी के अनुसार आबकारी नीति को संशोधित करते समय अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया।
दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को आबकारी नीति लागू की थी, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे वापस ले लिया गया था।
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