नयी दिल्ली, 12 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला की उस याचिका पर केंद्र से बुधवार को जवाब मांगा, जिसमें दावा किया गया है कि उसके भाई एवं मीडियाकर्मी जुल्फिकार अहमद खान पिछले साल से लापता हैं और केन्या की हिरासत में हैं।
महिला ने कहा है कि वह अपने भाई से संपर्क नहीं कर पा रही है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने विदेश मंत्रालय एवं गृह मंत्रालय को याचिका पर नोटिस जारी किया और उनसे दो सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
उच्च न्यायालय ने मामले को अगस्त में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
याचिका के अनुसार, खान (49) पिछले साल जुलाई में केन्या में लापता हो गये थे। वह बालाजी टेलीफिल्म्स के पूर्व मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) थे और इरोज, स्टार टीवी इंडिया और वार्नर ब्रदर्स के साथ भी काम कर चुके हैं।
याचिकाकर्ता अनीस फातिमा जकारिया ने कहा कि उसके भाई 24 जून, 2022 को पर्यटक वीजा पर केन्या गये थे और पिछले साल 22 जुलाई को खान और उनका दोस्त वेस्टलैंड्स के आसपास थे, तभी पुलिस अधिकारी होने का दावा करने वाले कुछ लोगों ने ‘‘गैरकानूनी और मनमाने ढंग से’’ उनके वाहन को रोका और उसे अपने कब्जे में ले लिया।
वकीलों निशांत सिंह और सागरिका तंवर के जरिए दायर याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता और उसके परिवार को जितनी जानकारी है, उसके अनुसार उन्हें (याचिकाकर्ता के भाई एवं उसके मित्र को) केन्या स्थानीय पुलिस के निर्देश पर हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता को कोई जानकारी नहीं है कि उसका भाई, उनका मित्र और कार चालक इस समय कहां है, वे जीवित भी हैं या नहीं और क्या उन्हें हिरासत में रखा गया है।’’
याचिका में कहा गया है कि परिवार ने नैरोबी में भारतीय दूतावास को इस बारे में सूचित किया है और केन्या उच्च न्यायालय में भी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है लेकिन इन प्रयासों के बावजूद लापता व्यक्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
इसमें कहा गया है कि भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के कार्यालय को भी इस बारे में सूचित किया गया है, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया गया है।
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