देश की खबरें | दिव्यांगजन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी याचिका पर न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा
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नयी दिल्ली, 13 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने दिव्यांगों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी याचिका पर शुक्रवार को केंद्र से जवाब मांगा।
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने सीमा गिरिजालाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को नोटिस जारी किया, जिसमें देश भर में दिव्यांगता संबंधी जिला स्तरीय समितियों के गठन की मांग की गई थी।
पीठ ने कहा, ‘‘हम निर्देश देते हैं कि भारत सरकार और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को नोटिस जारी किये जाएं। मंत्रालय एक महीने की अवधि के भीतर एक जवाबी हलफनामा (जवाब) दाखिल करेगा। हलफनामे में राज्यवार अधिनियम के क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध होगी।’’
न्यायालय ने केंद्र सरकार को अधिनियम के अनुपालन की वर्तमान स्थिति को जानने के लिए सभी संबंधित राज्यों और उनके प्रदेश सलाहकार बोर्ड की बैठक बुलाने का भी निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह फिलहाल सभी राज्यों को नोटिस जारी नहीं कर रही है और इस पर बाद में फैसला करेगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने इन दलीलों पर गौर किया कि अधिनियम के कई प्रावधान विभिन्न राज्यों में लागू नहीं किये गये हैं।
एक वकील ने कहा कि क़ानून के प्रावधानों के तहत कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विकलांगता पर एक जिला-स्तरीय समिति की स्थापना का प्रावधान है और कई राज्यों ने इसे लागू नहीं किया है।
‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम’ दिव्यांग लोगों को समावेशी शिक्षा, स्वरोजगार और व्यावसायिक प्रशिक्षण तक पहुंच प्रदान करता है।
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