देश की खबरें | अदालत ने धनशोधन मामले में एम्बियेंस समूह के प्रवर्तक की जमानत याचिका खारिज की

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नयी दिल्ली, 10 सितंबर दिल्ली की एक अदालत ने 800 करोड़ रुपये की कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के मामले में एम्बियेंस समूह के प्रवर्तक राज सिंह गहलोत की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने कहा, ''आरोपों और जांच की जटिल प्रकृति तथा जांच को प्रभावित करने के प्रयास की आशंका को देखते हुए, मेरा विचार है कि तत्काल जमानत आवेदन में कोई दम नहीं है और इसके अनुसार अर्जी खारिज की जाती है।''

गहलोत को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था।

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गहलोत, उनकी कंपनी अमन हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (एएचपीएल), एम्बियेंस समूह की कुछ अन्य कंपनियों, कंपनी में निदेशक दयानंद सिंह, मोहन सिंह गहलोत और उनके सहयोगियों के परिसरों पर पिछले साल जुलाई में छापे मारे थे।

गुरुग्राम के एम्बियेंस मॉल के भी प्रवर्तक, गहलोत के खिलाफ ईडी का मामला एएचपीएल और उसके निदेशकों के खिलाफ दिल्ली में यमुना खेल परिसर के पास 1, सीबीडी, महाराज सूरजमल रोड पर स्थित पांच सितारा लीला एम्बियेंस कन्वेंशन होटल के निर्माण एवं विकास में कथित धनशोधन के लिए जम्मू के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो की 2019 में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है।

ईडी की जांच में पाया गया कि 800 करोड़ रुपये से अधिक ऋण राशि के एक बड़े हिस्से का, जिसे होटल परियोजना के लिए बैंकों के परिसंघ ने मंजूरी दी थी, उसमें एएचपीएल, राज सिंह गहलोत और उनके सहयोगियों ने उनके स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से हेर-फेर किया गया था।

एजेंसी का आरोप है कि ऋण राशि का एक बड़ा हिस्सा एएचपीएल द्वारा कई कंपनियों और व्यक्तियों को मौजूदा बिलों के भुगतान और सामग्री की आपूर्ति तथा निष्पादित कार्य के लिए अग्रिम भुगतान के नाम पर स्थानांतरित कर दिया गया था।

ईडी ने कहा था कि एम्बियेंस समूह के कर्मचारियों और गहलोत के सहयोगियों को इन कंपनियों में निदेशक और मालिक बनाया गया था तथा गहलोत इन कंपनियों में से कई के ‘‘अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता’’ थे।

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