न्यायालय का अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मामले सीबीआई को सौंपने से इंकार,

न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने अपने 56 पेज के फैसले में कहा कि यह प्राथमिकी निरस्त कराने के लिये अर्णब गोस्वामी को सक्षम अदालत के पास जाना होगा। हालाकि, पीठ ने अर्णब गोस्वामी को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से तीन सप्ताह का संरक्षण प्रदान कर दिया है।

जमात

नयी दिल्ली, 19 मई रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से उस समय आंशिक राहत मिली जब शीर्ष अदालत ने पालघर में दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की भीड़ द्वारा पीट पीट कर हत्या की घटना से संबंधित कार्यक्रम के सिलसिले में नागपुर में दर्ज प्राथमिकी के अलावा शेष सभी मामले रद्द कर दिये लेकिन इसकी जांच सीबीआई को सौंपने से उसने इंकार कर दिया। नागपुर में दर्ज प्राथमिकी मुंबई स्थानांतरित कर दी गयी थी जिसकी जांच मुंबई पुलिस कर रही है।

न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने अपने 56 पेज के फैसले में कहा कि यह प्राथमिकी निरस्त कराने के लिये अर्णब गोस्वामी को सक्षम अदालत के पास जाना होगा। हालाकि, पीठ ने अर्णब गोस्वामी को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से तीन सप्ताह का संरक्षण प्रदान कर दिया है।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि प्रारंभिक प्राथमिकी, जो नागपुर में दर्ज हुयी थी, के अलावा बाकी सभी प्राथमिकी रद्द करते हुये कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी का मूल आधार है। नागपुर में दर्ज प्राथमिकी शीर्ष अदालत ने अर्नब गोस्वामी पर कथित हमले की शिकायत के साथ संयुक्त जांच के लिये मुंबई स्थानांतरित कर दी थी।

पीठ ने समाचार कार्यक्रम को लेकर अलग अलग स्थानों पर दायर प्राथमिकी रद्द करते हुये पीठ ने कहाकि इसका दमघोंटू प्रभाव होता। पीठ ने इसके साथ ही निर्देश दिया कि 21 अप्रैल के कार्यक्रम के संबंध में अब कोई नयी शिकायत या प्राथमिकी पर विचार नहीं किया जायेगा।

पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से अर्नब गोस्वामी की याचिका पर फैसला सुनाते हुये कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(ए) के तहत पत्रकार का अधिकार ऊंचे पायदान पर होता है और भारत में प्रेस की आजादी उस समय तक है जब तक पत्रकार सत्ता के सामने सच बोल सकता है लेकिन यह स्वतंत्रता निर्बाधित नहीं है।

शीर्ष अदालत ने 11 मई को अपने आदेश में कहा था कि मुंबई पुलिस द्वारा दो मई को दर्ज नयी प्राथमिकी में अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इस प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि उनके कार्यक्रम में की गयी कुछ टिप्पणियों से धार्मिक भावनाएं आहत हुयी हैं।

अपने कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कुछ कथित मानहानिकारक बयानों के कारण अर्नब गोस्वामी के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थीं। इन प्राथमिकी को निरस्त कराने के लिये उन्होंने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी।

गोस्वामी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि मुंबई पुलिस ने कथित मानहानिकारक बयानों के सिलसिले में उनसे 12 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी और इसमें शामिल दो अधिकारियों में से एक अधिकारी में कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुयी थी।

इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने भी एक आवेदन दायर कर आरोप लगाया था कि अर्नब पुलिस को धमकाने का प्रयास करते हैं। आवेदन में अर्नब को दंडात्मक कार्रवाई से मिले संरक्षण का दुरूपयोग करने से रोकने का अनुरोध किया गया था।

अनूप

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