नयी दिल्ली, 12 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बलात्कार के एक मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम की उस याचिका पर विचार करने से मंगलवार को इनकार कर दिया, जिसमें उसकी सजा स्थगित करने का अनुरोध किया गया था।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने आसाराम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत से कहा कि यह न्यायालय याचिका पर विचार करने का इच्छुक नहीं है। पीठ ने उनसे उसकी (आसाराम की) उम्रकैद की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील पर दलील की तैयारी करने को कहा।
आसाराम को जोधपुर की एक निचली अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
कामत ने दलील दी कि उनका मुवक्किल करीब 10 साल से जेल में है और उच्च न्यायालय ने उसके खराब स्वास्थ्य के पहलू पर विचार नहीं कर त्रुटि की।
पीठ ने कहा, ‘‘आपको एक नियमित अपील के लिए तैयारी करनी चाहिए, जो उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आनी है।’’ इसने कहा कि यह राजस्थान उच्च न्यायालय के सात जुलाई 2022 के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज करने की इच्छुक है।
कामत ने अदालत से अपील खाारिज नहीं करने का अनुरोध किया और कहा कि वह इसे वापस लेना चाहते हैं।
इसके बाद पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और कहा कि यदि आसाराम की दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ नियमित अपील शीघ्रता से सुनवाई के लिए नहीं ली गई, तो उन्हें सजा स्थगित कराने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष नयी अर्जी दायर करने की छूट होगी।
आसाराम अपने आश्रम में एक किशोरी के साथ बलात्कार के मामले में इंदौर में गिरफ्तार किये जाने और जोधपुर लाये जाने के बाद, दो सितंबर 2013 से जेल में है।
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