देश की खबरें | अदालत ने पीडब्ल्यूडी की याचिका पर दिल्ली सरकार, अन्य को नोटिस जारी किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के नवीनीकरण में नियमों के कथित ‘‘घोर उल्लंघन’’ के संबंध में सतर्कता निदेशालय द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली पीडब्ल्यूडी के छह अधिकारियों की याचिका पर बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार और अन्य से जवाब मांगा।
नयी दिल्ली, 17 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के नवीनीकरण में नियमों के कथित ‘‘घोर उल्लंघन’’ के संबंध में सतर्कता निदेशालय द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली पीडब्ल्यूडी के छह अधिकारियों की याचिका पर बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार और अन्य से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने याचिका पर सतर्कता निदेशालय के माध्यम से दिल्ली सरकार, विशेष सचिव (सतर्कता) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को नोटिस जारी किया और उन्हें जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए तय की।
उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा और दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी, जो सतर्कता निदेशालय और पीडब्ल्यूडी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, के बयानों को रिकॉर्ड पर लिया कि सुनवाई की अगली तारीख तक अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा कि विशेष सचिव (सतर्कता) वाई.वी.वी.जे. राजशेखर को राज्य की ओर से दिए गए बयान पर गंभीर आपत्ति है।
राजशेखर सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थे और उन्होंने नोटिस स्वीकार किया।
इस बीच, अदालत ने याचिका में प्रतिवादी पक्ष के रूप में पीडब्ल्यूडी मंत्री के कार्यालय और मुख्यमंत्री के कार्यालय को हटा दिया।
सतर्कता निदेशालय ने केजरीवाल के आधिकारिक आवास के नवीनीकरण में नियमों के कथित ‘‘घोर उल्लंघन’’ के संबंध में छह पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
संबंधित मुख्य अभियंताओं और अन्य पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनसे अपनी इस कार्रवाई को स्पष्ट करने को कहा गया है।
उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने छह अधिकारियों का पक्ष रखा। याचिका में विशेष सचिव (सतर्कता) द्वारा 19 जून को अधिकारियों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया कि नोटिस ‘‘दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार में सत्तारूढ़ दल के बीच राजनीतिक झगड़े का परिणाम’’ थे और याचिकाकर्ताओं को मामले में ‘‘बलि का बकरा’’ बनाया गया है।
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