लॉकडाउन के दौरान न्यायालय ने 593 मामलों की सुनवाई की, 215 मामलों में फैसले सुनाए

उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर 23 मार्च को ही याचिकाकर्ताओं और वकीलों के लिये अपने दरवाजे बंद कर दिये थे लेकिन आभासी तरीके से ऑनलाइन माध्यम से मामलों की सुनवाई का नया रास्ता खोला। हालांकि, इस दौरान उसने अपनी पूर्ण क्षमता के साथ मामलों की सुनवाई नहीं की।

जमात

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिये देश भर में जारी अभूतपूर्व लॉकडाउन के दौरान एक महीने में उच्चतम न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 593 मामलों की सुनवाई की और उनमें से 215 में फैसला भी सुनाया।

उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर 23 मार्च को ही याचिकाकर्ताओं और वकीलों के लिये अपने दरवाजे बंद कर दिये थे लेकिन आभासी तरीके से ऑनलाइन माध्यम से मामलों की सुनवाई का नया रास्ता खोला। हालांकि, इस दौरान उसने अपनी पूर्ण क्षमता के साथ मामलों की सुनवाई नहीं की।

आम दिनों में शीर्ष अदालत एक महीने में औसतन करीब 3500 मामलों का निपटारा करती है।

बंद के दौरान अदालत की दो से तीन पीठ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “अत्यावश्यक” मामलों की सुनवाई कर रही है, जबकि आम दिनों में अदालत की 16 पीठ सुनवाई करती है।

अदालत द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े के मुताबिक 23 मार्च से 24 अप्रैल के बीच 17 कार्यदिवस में कुल 87 पीठों ने 593 मामलों की सुनवाई की।

देशव्यापी बंद 25 मार्च से शुरू हुआ था लेकिन उच्चतम न्यायालय ने एक परिपत्र जारी कर 23 मार्च को ही वकीलों और याचिकाकर्ताओं के अदालत परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी।

परिपत्र में कहा गया था कि सिर्फ अत्यावश्यक मामले शीर्ष अदालत द्वारा बंद के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुने जाएंगे। केंद्र सरकार ने बंद की अवधि तीन मई तक बढ़ा दी है।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 24 अप्रैल तक 84 पुनर्विचार याचिकाओं को निस्तारित किया गया।

इसमें कहा गया कि 87 पीठों में से 34 ने मुख्य मामले की सुनवाई की जबकि 53 ने पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला दिया।

आंकड़ों में कहा गया कि इस अवधि के दौरान 390 मुख्य मामलों के साथ ही 203 संबंधित मामलों पर सुनवाई की गई।

इसमें कहा गया कि 215 मामलों में फैसला दिया गया जिनमें से 174 संबंधित मामले थे।

सूत्रों ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अपने घरों से सुनवाई कर रहे न्यायाधीशों को उनके आवास पर 100 एमबीपीएस स्पीड के साथ इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है और उन्हें सुनवाई में कोई परेशानी नहीं आ रही।

सूत्रों ने कहा कि कई वकील सुनवाई में अपने मोबाइल फोन या टैबलेट के जरिये जुड़ते हैं, ऐसे में उनके उपकरण पर जब कोई कॉल आती है तो उनका संपर्क टूट जाता है।

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