देश की खबरें | सीओपी29 का आगाज : मेजबान अजरबैजान का नये जलवायु वित्त लक्ष्य पर मतभेद सुलझाने का आह्वान

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नयी दिल्ली, 11 नवंबर संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु सम्मेलन की मेजबानी कर रहे अजरबैजान ने सोमवार को सदस्य देशों से अपील की कि वे विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और उसके अनुकूल होने में मदद करने के वास्ते नये जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमत होने के लिए तत्काल मतभेदों को सुलझाएं।

संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीओपी29 के अध्यक्ष मुख्तार बाबायेव ने कहा कि वर्तमान नीतियां विश्व को तीन डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की ओर ले जा रही हैं, जो अरबों लोगों के लिए विनाशकारी होगा।

उन्होंने कहा कि सीओपी29 अध्यक्षता की शीर्ष प्राथमिकता एक निष्पक्ष और महत्वाकांक्षी नए सामूहिक परिमाणात्मक लक्ष्य (एनसीक्यूजी) या नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर आम सहमति बनाना है, जो 2009 में सहमत 100 अरब अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष मदद के पिछले लक्ष्य का स्थान लेगा।

बाबायेव ने जोर दिया कि समस्या के स्तर और तात्कालिकता के मद्देनजर एनसीक्यूजी प्रभावी और पर्याप्त होना चाहिए।

अजरबैजान के पारिस्थितिकी एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ने कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है, समझौते को अंतिम रूप देने में सिर्फ 12 दिन बचे हैं।

उन्होंने कहा कि अब देशों को तत्काल समझौते के पहलुओं को अंतिम रूप देने, योगदानकर्ताओं और वित्तीय योगदान की मात्रा पर अपने मतभेदों को सुलझाने और नया लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता है।

बाबयेव ने स्वीकार किया कि राजनीतिक और वित्तीय पहलू से वार्ता बहुत जटिल और चुनौतियों से भरी है।

उन्होंने कहा कि भले ही ये संख्याएं (वित्तीय सहायता) बड़ी लगे, लेकिन निष्क्रियता के खामियाजे के सामने ये बहुत कम हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन से ज्यादा किसी चीज का सभी देशों की सुरक्षा, समृद्धि और खुशहाली पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है।’’

हाल के महीनों में नए जलवायु वित्त लक्ष्य पर हुई बातचीत में गहरे मतभेद सामने आए हैं। इसमें देश एनसीक्यूजी के लगभग हर पहलु पर असहमत हैं, जिनमें आवश्यक वित्तपोषण की राशि, योगदान देने वाले राष्ट्र, पात्र परियोजनाओं के प्रकार और इसके लिए आवश्यक समयावधि शामिल है।

विकासशील देशों ने दलील दी है कि 2009 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमति के विपरीत एनसीक्यूजी को उनकी ‘‘आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं’’ पर ध्यान देना चाहिए।

विभिन्न अनुमानों के मुताबिक, विकासशील और गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन का सामना करने और खुद को तैयार करने के लिए आने वाले वर्षों में हजारों अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी।

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