सिलचर, 11 जून असम के कछार जिले में एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण करने के राज्य सरकार के प्रयासों को लेकर विवाद पैदा हो गया है, क्योंकि केंद्र सरकार का दावा है कि भाजपा नीत असम सरकार की ओर से उसे इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।
तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव द्वारा लिखे गए पत्र पर नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जवाब के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज तक मंत्रालय को असम के कछार जिले में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा के निर्माण का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यदि किसी हवाई अड्डा विकासकर्ता या राज्य सरकार द्वारा ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त होता है, तो उस पर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा नीति, 2008 के अनुसार विचार किया जाएगा।
ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा का अर्थ एक नया हवाई अड्डा बनाए से है, क्योंकि मौजूदा सुविधा अनुमानित यातायात आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ है।
अतिरिक्त उपायुक्त (राजस्व) पंकज कुमार डेका ने एक बयान में कहा कि डोलू में हवाई अड्डा के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रक्रिया के बाद की गई थी।
डेका ने स्पष्ट किया कि असम सरकार हवाई अड्डा निर्माण के लिए अपने पैसे से भूमि अधिग्रहण कर रही है। उन्होंने कहा कि औपचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद राज्य सरकार और केंद्र सरकार आगे का कदम उठाएगी।
डेका ने कहा कि इस मामले में असम सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय पिछले तीन साल से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण की टीम ने निरीक्षण के लिए प्रस्तावित स्थल का जनवरी 2020 में दौरा किया था।
सांसद देव ने आरोप लगाया कि सिलचर के लोकसभा सांसद राजदीप रॉय ने ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा के मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक में सदस्यों को ‘‘गुमराह’’ किया था । देव ने कहा कि जमीन खाली करने के लिए 30 लाख से अधिक चाय की झाड़ियों को काट देना विचित्र बात है। राज्यसभा सांसद ने भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
इसके पहले रॉय ने कहा था कि यह बेदखली का अभियान नहीं है, बल्कि केवल एक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया है जो बराक घाटी में एक महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजना के लिए चल रही है जिसे लंबे समय से उपेक्षित किया गया है।
उन्होंने कहा कि हवाई अड्डा के लिए केवल 2500 बीघा भूमि का उपयोग किया जा रहा है, जबकि शेष भूमि का उपयोग अधिक पेड़ लगाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डोलू चाय बागान के प्रबंधन ने इस संबंध में जिला प्रशासन को अपनी सहमति दे दी है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY