जरुरी जानकारी | उपभोक्ता अदालत ने 'भ्रामक' विज्ञापन के लिए 743 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति याचिका को खारिज किया
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नयी दिल्ली, 29 सितंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक ई-कॉमर्स कंपनी से कथित रूप से भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने और अनुचित व्यापार नीति को अपनाने के लिए 743 करोड़ रुपये के दंडात्मक क्षतिपूर्ति की मांग करने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
दिल्ली के शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसने 23 फरवरी, 2016 को कंपनी की वेबसाइट से एक मोबाइल फोन खरीदा था, लेकिन कुछ दिनों के बाद डिवाइस गर्म होने लगा, जिससे उसे इसे वापस करने और धनवापसी के लिए आवेदन करना पड़ा।
हालांकि, उन्हें कंपनी द्वारा सूचित किया गया था कि उनके ऑर्डर से 16 दिन पहले वापसी नीति बदल दी थी और वह केवल सामान को "मुफ्त बदलने" के लिए पात्र होंगे, न कि धन वापसी के। जिसके बाद उसने कंपनी पर अनुचित व्यापार नीति का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता अदालत का रुख किया था।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि बिल में उसे फोन वापस करने का विकल्प दिया गया था और यह ऑर्डर सूची में भी दिखाई दे रहा था।
उसने आरोप लगाया कि कंपनी ने आसान वापसी नीति के भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार नीति को अपनाकर असंख्य उपभोक्ताओं को धोखा दिया है।
उन्होंने उनके द्वारा खरीदे गए फोन के लिए 9,119 रुपये के मुआवजे के साथ-साथ मुकदमेबाजी और एक लाख रुपये की परिवहन लागत और 743 करोड़ रुपये की दंडात्मक क्षतिपूर्ति की मांग की, जिससे उन्हें कानूनी और वित्तीय नुकसान हुआ।
उन्होंने बड़े पैमाने पर कई उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए अदालत की अनुमति भी मांगी।
शिकायत को खारिज करते हुए, एनसीडीआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल और सदस्य एसएम कांतिकर ने कहा, "हमारा विचार है कि शिकायतकर्ता द्वारा ऐसे ही उपभोक्ताओं की ओर से एक संयुक्त शिकायत के रूप में दायर की गई शिकायत विचारणीय नहीं है और यह खारिज करने योग्य है।"
आयोग ने आगे कहा कि ई-कॉमर्स कंपनी ने अपनी वापसी नीति में बदलाव के बारे में समाचार पत्रों और ऑनलाइन पोर्टलों में अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय ओं में प्रकाशित किया था।
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