देश की खबरें | कांग्रेस ने संविधान प्रस्तावना के शब्दों की समीक्षा के आरएसएस के आह्वान पर साधा निशाना

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. संविधान की प्रस्तावना में ‘‘समाजवादी’’ और ‘‘धर्मनिरपेक्ष’’ शब्दों की समीक्षा करने संबंधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरएसएस और भाजपा पर ‘‘संविधान विरोधी’’ होने का आरोप लगाया।

नयी दिल्ली, 26 जून संविधान की प्रस्तावना में ‘‘समाजवादी’’ और ‘‘धर्मनिरपेक्ष’’ शब्दों की समीक्षा करने संबंधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरएसएस और भाजपा पर ‘‘संविधान विरोधी’’ होने का आरोप लगाया।

होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना में ‘‘समाजवादी’’ और ‘‘धर्मनिरपेक्ष’’ शब्दों की समीक्षा करने का आह्वान किया है।

कांग्रेस ने कहा कि वह भाजपा-आरएसएस की 'साजिश' को कभी सफल नहीं होने देगी और ऐसे किसी भी कदम का विरोध करेगी।

कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘आरएसएस-भाजपा की सोच संविधान विरोधी है। अब आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना में बदलाव की मांग की है।’’

विपक्षी दल ने दावा किया कि होसबाले चाहते हैं कि संविधान की प्रस्तावना से "समाजवादी" और "धर्मनिरपेक्ष" शब्द हटा दिए जाएं। कांग्रेस ने कहा, "यह बाबा साहब के संविधान को नष्ट करने की साजिश है, जिसे आरएसएस-भाजपा लंबे समय से रच रही है।"

विपक्षी दल ने दावा किया कि जब संविधान लागू हुआ था तब आरएसएस ने इसका विरोध किया था, इसकी प्रतियां जलाई थी।

कांग्रेस ने कहा, ‘‘लोकसभा चुनाव में तो भाजपा के नेता खुलकर कह रहे थे कि हमें संविधान बदलने के लिए संसद में 400 से ज्यादा सीट चाहिए। अब एक बार फिर वे अपनी साजिशों में लग गए हैं, लेकिन कांग्रेस किसी कीमत पर इनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी।’’

आरएसएस ने संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों की समीक्षा करने का आह्वान करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इन्हें आपातकाल के दौरान शामिल किया गया था और ये कभी भी बी आर आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का हिस्सा नहीं थे।

आपातकाल पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबाले ने कहा, ‘‘बाबा साहेब आंबेडकर ने जो संविधान बनाया, उसकी प्रस्तावना में ये शब्द कभी नहीं थे। आपातकाल के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका पंगु हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए।"

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बाद में चर्चा हुई लेकिन प्रस्तावना से उन्हें हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। होसबाले ने कहा, ‘‘इसलिए उन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए।’’

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