देश की खबरें | कांग्रेस अवसरवादी राजनीति कर जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक मुख्यधारा में ला रही: भाजपा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर ‘‘बेशर्मी से’’ अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि विपक्षी पार्टी एक तरफ संविधान एवं धर्मनिरपेक्षता की रक्षा की बात करती है लेकिन दूसरी तरफ इस्लामी शासन चाहने वाले जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन से समर्थन लेती है।

नयी दिल्ली, दो जुलाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर ‘‘बेशर्मी से’’ अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि विपक्षी पार्टी एक तरफ संविधान एवं धर्मनिरपेक्षता की रक्षा की बात करती है लेकिन दूसरी तरफ इस्लामी शासन चाहने वाले जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन से समर्थन लेती है।

भाजपा की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि कांग्रेस ने हाल में राज्य में नीलांबुर विधानसभा उपचुनाव में उस इस्लामी संगठन से खुलेआम समर्थन मांगा जो ‘‘धर्मनिरपेक्षता और संविधान में विश्वास नहीं करता।’’

उन्होंने दावा किया कि यहां तक ​​कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिवंगत कांग्रेस नेता ओमन चांडी ने भी संगठन को राष्ट्र-विरोधी करार दिया था और इसे मुख्यधारा की राजनीति से बाहर इसलिए ही रखा गया था क्योंकि कांग्रेस भी इसे बहुत खतरनाक मानती थी।

चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी हताशा और अवसरवादिता में इस राष्ट्रविरोधी और खतरनाक संगठन को मुख्यधारा की राजनीति में ले आई है।

उन्होंने कहा कि पार्टी एक तरफ संविधान और धर्मनिरपेक्षता को बचाने की बात करती है लेकिन दूसरी तरफ एक ऐसे संगठन से हाथ मिलाती है जो इनमें से किसी में भी विश्वास नहीं करता।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बेशर्मी की पराकाष्ठा है।’’

चंद्रशेखर ने दावा किया कि अन्य समुदाय समझ गए हैं कि कांग्रेस ने वोट के लिए किस तरह लोगों को बेवकूफ बनाया है लेकिन पार्टी जमात-ए-इस्लामी और इमारत-ए-शरिया जैसे संगठनों को खुश करके मुसलमानों का दिल जीतने के लिए तुष्टीकरण का सहारा ले रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास विकास के लिए कोई एजेंडा नहीं है और इसकी राजनीति भ्रष्टाचार एवं तुष्टीकरण पर आधारित है।

कांग्रेस नीत विपक्षी यूडीएफ ने कड़े मुकाबले वाले उपचुनाव में पिछले महीने नीलांबुर विधानसभा क्षेत्र को सत्तारूढ़ एलडीएफ के हाथों से छीन लिया था। इसे अगले साल केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए बड़ा झटका माना जाना जा रहा है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now