हावेरी (कर्नाटक), एक मार्च यूक्रेन में जारी सैन्य कार्रवाई में मंगलवार को भारत के छात्र नवीन शेखराप्पा ज्ञानगौदर की मौत हो गई। वह खारकीव में खाने का सामान लेने बंकर से बाहर निकले थे और गोलाबारी की चपेट में आ गए।
इसके बाद अन्य चिंतित अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चों के सुरक्षित लौटने तक प्रधानमंत्री पूर्वी यूरोपीय देश में संघर्ष विराम सुनिश्चित कराएं।
स्थानीय भाजपा सांसद पर यूक्रेन में फंसे छात्रों का फोन नहीं उठाने का आरोप लगा। हालांकि उन्होंने इससे इनकार किया है।
पीड़ित के परिवार के सदस्यों ने कहा कि नवीन खारकीव मेडकिल कॉलेज में चौथे वर्ष के छात्र थे।
उनके चाचा उज्जनगौड़ा ने दावा किया कि नवीन कर्नाटक के अन्य छात्रों के साथ खारकीव के एक बंकर में फंसा हुए थे। वह सुबह में मुद्रा बदलवाने और खाने का सामान लेने गए थे तभी गोलाबारी की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई।
उज्जनगौड़ा ने कहा कि मंगलवार को ही नवीन अपने पिता से फोन पर बातचीत की थी और बताया था कि बंकर में खाने-पीने को कुछ नहीं है।
खारकीव में विद्यार्थी समन्वयक पूजा प्रहराज के मुताबिक, हमले के बाद यूक्रेन की एक महिला ने नवीन का फोन उठाया और कहा कि फोन के मालिक को मुर्दा घर ले जाया जा रहा है।
प्रहराज ने एनडीटीवी से कहा, “ वह गवर्नर के घर के पास रहते थे और खाने के लिए कतार में लगे थे। अचानक से हवाई हमला हुआ जिसने गवर्नर के घर को उड़ा दिया और उनकी मौत हो गई।”
चालगेरी स्थित पीड़ित के घर पर उनकी मौत की खबर के बाद से मातम पसरा है और बड़ी संख्या में लोग उनके परिवार को दिलासा देने के लिए पहुंच रहे हैं।
छात्र के पिता ज्ञानगौड़ा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि खारकीव में फंसे भारत के छात्रों से भारतीय दूतावास से किसी ने संपर्क नहीं किया।
इस त्रासदी का पता चलने पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने ज्ञानगौड़ा को फोन किया और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
बोम्मई ने ज्ञानगौड़ा को आश्वस्त किया कि वह उनके बेटे की पार्थिव देह को भारत वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। मुख्यमंत्री ने उन्हें यह भी बताया कि वह विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
शोकसंतप्त पिता ने बोम्मई से कहा कि नवीन ने उन्हें (मंगलवार) सुबह में फोन बात की थी। ज्ञानगौड़ा ने बताया कि नवीन रोज़ाना दो-तीन बार उन्हें फोन करता था।
बोम्मई ने ट्विटर पर नवीन की मौत पर हैरानी जताते हुए कहा, “ परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। हम लगातार विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं और उनके पार्थिव शरीर को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”
नवीन की मौत के बाद खारकीव में फंसे चालगेरी के अन्य मेडिकल विद्यार्थियों के माता-पिता को अपने बच्चों की सलामती की चिंता सताने लगी है।
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे प्रवीण के पिता श्रीनिवास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि छात्रों को रूसी सीमा से वापस लाया जाए जो खारकीव के बहुत नज़दीक है।
श्नीनिवास ने कहा, “ मेरा बेटा और अन्य लोग बंकर में हैं। वे सब कह रहे हैं कि वे तभी जीवित रहेंगे जब उन्हें वापस लाया जाएगा, नहीं तो वे सभी मर जाएंगे। हमारे प्रधानमंत्री को दोनों पक्षों (रूस और यूक्रेन) से बात करनी चाहिए और हमारे बच्चों के लौटने तक युद्धविराम सुनिश्चित करना चाहिए। यह कोशिश करना जरूरी है, जो कोई नहीं कर रहा है।”
एक अन्य पिता श्रीधर कृष्ण मूर्ति हावेरी-गडक भाजपा सांसद शिवकुमार उदासी से खफा हैं, क्योंकि वह फोन नहीं उठा रहे हैं।
मूर्ति ने कहा, “ मेरे बेटा सुमन पिछले एक हफ्ते से शिवकुमार उदासी को फोन कर रहा था लेकिन वह कॉल उठा नहीं रहे थे। मेरे बेटे ने उन्हें संदेश भी भेजा है लेकिन कोई जवाब नहीं आया। आज सुबह भी उसने उदासी को फोन किया।”
मूर्ति के मुताबिक, चालगेरी के तीन छात्र हैं और नवीन की मौत के बाद वे अपने बच्चों की हालत को लेकर चिंतित हैं।
वेंकटेश का बेटा भी खारकीव में एक बंकर में फंसा हुआ है। उन्होंने युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय छात्रों को वापस लाने के लिए मोदी से मदद की अपील की।
वेंकटेश ने कहा, “ हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हमारे बच्चों की मदद के लिए आग्रह करते हैं। यह मोदी के लिए बड़ी चीज़ नहीं है। अगर वह मन बना लें तो वह इसे संभव कर देंगे।”
उनके मुताबिक, कर्नाटक के बंकर में फंसे छात्रों के पास तीन दिन से खाने और पानी का सामान नहीं है।
मूर्ति के आरोपों का खंडन करते हुए उदासी ने कहा कि उन्होंने माता-पिता को बताया है कि उन्होंने उनके बच्चों से बात की है।
उदासी ने पीटीआई- से कहा, “मैंने दिखाया कि मैंने उनसे कैसे बात की और उन्हें व्हाट्सएप कॉल किया। मैंने उन्हें दिखाया कि मैं कैसे सुमन और अन्य लोगों के संपर्क में हूं।”
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