देश की खबरें | अफ्रीका के ‘पुनरुत्थान’ के बिना व्यापक वैश्विक पुनर्संतुलन अपूर्ण: भारत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि अफ्रीका के वास्तविक ‘पुनरुत्थान’ के बिना कोई भी व्यापक वैश्विक पुनर्संतुलन अपूर्ण है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 22 सितंबर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि अफ्रीका के वास्तविक ‘पुनरुत्थान’ के बिना कोई भी व्यापक वैश्विक पुनर्संतुलन अपूर्ण है।

उन्होंने अफ्रीका महाद्वीप की विकास की यात्रा के समर्थन में भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए यह बात कही।

यह भी पढ़े | Delhi DTC Bus: राजधानी दिल्ली में सभी डीटीसी और क्लस्टर बसों में होगी कैशलेस ई-टिकटिंग.

भारत-अफ्रीका भागीदारी पर आयोजित संगोष्ठी में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि नयी दिल्ली समकालीन विश्व में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में अफ्रीका के विकास एवं उभार का स्वागत करती है।

जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के प्रभाव के बारे में भी बात की और कहा कि इसके परिणाम दूरगामी होंगे।

यह भी पढ़े | Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में सीमा के पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद.

उन्होंने कहा, ‘‘महामारी पिछले 80 साल का सर्वाधिक दुर्बलताकारी वैश्विक घटनाक्रम है। हम इतिहास में ऐसे मोड़ पर हैं जिसकी तुलना द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम से की जा सकती है।’’

महामारी की चपेट में विश्वभर में तीन करोड़ 10 लाख से अधिक लोग आए हैं और लगभग 9,60,000 लोगों की मौत हुई है।

अफ्रीका की विकास यात्रा पर जयशंकर ने कहा कि भारत महाद्वीप के देशों की उनकी ‘‘निजी प्राथमिकताओं और हमारे साझा मूल्यों’’ के आधार पर मदद करने को कटिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि अफ्रीका के साथ भारत के संबंध चार महत्वपूर्ण स्तंभों-विकास भागीदारी, व्यापार, लोगों से लोगों के संपर्क और रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग पर आधारित हैं।

जयशंकर ने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के लिए भी महाद्वीप के साथ काम करने को लेकर आशान्वित है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ अपनी विकास भागीदारी मजबूत की है जहां चीन भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के लिए वैश्विक प्रणाली के स्तंभों में से एक के रूप में अफ्रीका का उभार न सिर्फ वांछनीय है, बल्कि अत्यंत आवश्यक भी है। असल में यह हमारी विदेश नीति सोच का मूल तत्व है।’’

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘अफ्रीका के वास्तविक पुनरुत्थान के बिना व्यापक वैश्विक पुनर्संतुलन अपूर्ण है। केवल तभी विश्व की रणनीतिक विविधता पूरी तरह खुलकर समाने आएगी। समकालीन विश्व के एक महत्वपूर्ण के कारक के रूप में अफ्रीका के उभार और विकास का भारत स्वागत करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘2015 से भारत की तरफ से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के स्तर पर अफ्रीका की उच्चस्तरीय यात्राएं हुई हैं। इस अवधि में यह अभूतपूर्व है।’’

जयशंकर ने कहा कि पिछले छह साल में करीब 100 अफ्रीकी नेताओं ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के लिए भारत की यात्रा की है।

उन्होंने कहा कि भारत के अब 38 अफ्रीकी देशों में आवासिक मिशन हैं तथा अन्य मिशनों की स्थापना की जा रही है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\