विदेश की खबरें | यूएनएचआरसी में मतदान से भारत के अनुपस्थित रहने पर चीन की खामोशी बरकरार
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

बीजिंग, आठ अक्टूबर चीन ने शिंजियांग में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में हुए मतदान में भारत के अनुपस्थित रहने पर शनिवार को भी अपनी खामोशी बरकरार रखी।

हालांकि, चीन ने शिंजियांग में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह आतंकवाद और अलगाववाद को रोकने के प्रति लक्षित है।

जिनेवा में, यूएनएचआरसी में बृहस्पतिवार को शिंजियांग मुद्दे पर मतदान से भारत के अनुपस्थित रहने के बाद चीन की यह टिप्पणी आई है।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को भारत ने इस स्वायत्त क्षेत्र के लोगों के अधिकारों का सम्मान करने और गारंटी प्रदान करने की पहली बार अपील की थी।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, ‘‘मैंने संबद्ध खबरें देखी हैं और जोर देते हुए यह कहना चाहती हूं कि शिंजियांग से जुड़े मुद्दे मानवाधिकारों से नहीं, बल्कि आतंकवाद का मुकाबला करने से संबद्ध हैं।’’ उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अरिंदम बागची की टिप्पणियों के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में यह कहा।

माओ ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘प्रबल कोशिशों के कारण लगातार पांच वर्षों से शिंजियांग में हिंसक आतंकी घटनाएं नहीं हुईं। ’’

हालांकि, यूएनएचआरसी में मतदान से भारत के अनुपस्थित रहने पर उनकी प्रतिक्रिया मांगे जाने पर वह खामोश रहीं। संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार संस्था में एक प्रस्ताव लाकर शिंजियांग में मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा कराने की मांग की गई थी।

माओ ने दावा किया कि मतदान से यह प्रदर्शित हुआ कि सच्चाई की सदा जीत होगी।

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