देश की खबरें | छत्तीसगढ़ : बघेल ने पाटन सीट जीता लेकिन राज्य हार गए

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रायपुर, तीन दिसंबर एग्जिट पोल में कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने रहने की तैयारी कर रहे भूपेश बघेल को रविवार को तब झटका लगा जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके हाथों से जीत छीन ली।

रविवार रात मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस नेता ने पाटन विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार विजय बघेल को 19,723 वोटों से हराकर विजयी हुए हैं।

2018 में मुख्यमंत्री बने बघेल पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस के सबसे मजबूत क्षेत्रीय नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं।

अपनी कल्याणकारी योजनाओं, क्षेत्रीय गौरव के आह्वान और चतुर राजनीतिक कौशल के साथ उन्होंने पार्टी के भीतर चुनौतियों का सामना किया तथा 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले वह कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बन गए।

राज्य में लोग उन्हें प्यार से 'कका' (चाचा) कहते हैं। सार्वजनिक भाषणों के दौरान "कका अभी जिंदा हैं" (काका अभी भी जीवित हैं) बघेल की पसंदीदा पंचलाइन रही है।

2013 में कांग्रेस के लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद, बघेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।

इससे पहले पार्टी को तब बड़ा झटका लगा था जब मई 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले में उसके कई नेता मारे गए थे।

बाद में विधानसभा में तत्कालीन विपक्ष के नेता टी एस सिंह देव के साथ बघेल ने छत्तीसगढ़ में पार्टी का पुनर्निर्माण किया।

जब 2018 में कांग्रेस सत्ता में आई तो सिंहदेव, चरणदास महंत और ताम्रध्वज साहू जैसे प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए बघेल मुख्यमंत्री पद की दौड़ में विजेता बनकर उभरे।

2023 में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की, लेकिन चुनाव अभियान उसके इर्द-गिर्द घूमता रहा।

पांच साल पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद, बघेल ने अपनी छवि 'माटी पुत्र' के रूप में बनाई।

किसानों, आदिवासी समुदायों और गरीबों के लिए उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं ने उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई।

बघेल राज्य के पहले नेताओं में से एक हैं जिन्होंने क्षेत्रीय गौरव की भावना को बढ़ाया और `छत्तीसगढ़ियावाद' की बात की। उन्होंने क्षेत्रीय त्योहारों, खेल, कला और संस्कृति को भी बढ़ावा दिया।

जब उनके पिता नंद कुमार बघेल ने कथित तौर पर तथाकथित उच्च जाति समुदाय के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की तो बघेल ने तुरंत उन्हें गिरफ्तार कर लिया और कहा कि इस सरकार के तहत कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।

प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बघेल की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश की। अन्य क्षेत्रीय कांग्रेस नेताओं के विपरीत, बघेल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना करने से नहीं कतराते थे।

भाजपा ने भ्रष्टाचार को लेकर बघेल पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए "एटीएम" बन गया है।

चुनाव से ठीक पहले, उन्हें कथित महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाले को लेकर निशाना बनाया गया था, लेकिन उन्होंने यह दावा करते हुए पलटवार किया कि भाजपा अपने प्रतिद्वंद्वियों को परेशान करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

बघेल का जन्म 23 अगस्त, 1961 को दुर्ग जिले में एक कुर्मी किसान परिवार में हुआ। कुर्मी, राज्य में एक प्रभावशाली ओबीसी समुदाय है, जो राज्य की लगभग 2.5 करोड़ की आबादी का करीब 14 प्रतिशत है।

उन्होंने 1980 के दशक में राजनीति में प्रवेश किया और 1993 में पहली बार वह तत्कालीन अविभाजित मध्य प्रदेश की विधानसभा के लिए पाटन से चुने गए। उन्होंने 1998 और 2003 में भी सीट जीती।

2008 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के विजय बघेल से हार गये थे। वह 2009 में रायपुर लोकसभा सीट से भाजपा के रमेश बैस से भी हार गए थे।

उन्होंने 2013 में पाटन विधानसभा सीट पर दोबारा निर्वाचित हुए और 2018 में फिर से वहां से जीत हासिल की।

2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, उन्होंने अजीत जोगी सरकार (2000-2003) में राजस्व मंत्री के रूप में कार्य किया।

बघेल के नेतृत्व को 2021 में तब एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा जब उनके कैबिनेट सहयोगी टीएस सिंह देव के समर्थकों ने दावा किया कि पार्टी सिंहदेव को ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनाने पर सहमत हुई थी।

लेकिन बघेल आलाकमान को बताने में सफल रहे कि ज्यादातर विधायक उनके साथ हैं।

बघेल के विरोधी माने जाने वाले सिंहदेव को चुनाव से कुछ महीने पहले जून 2023 में उपमुख्यमंत्री बनाया गया।

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