देश की खबरें | क्या ओडिशा में लौह अयस्क खनन की कोई सीमा तय की जा सकती है, न्यायालय ने केंद्र से पूछा

नयी दिल्ली, 14 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से जानना चाहा कि क्या ओडिशा में सीमित लौह अयस्क भंडार को ध्यान में रखते हुए राज्य में खनन की कोई सीमा तय की जा सकती है।

इस बीच, प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने ओडिशा सरकार को खनन मानदंडों का उल्लंघन करने का दोषी ठहराए गए चूककर्ताओं से ब्याज को छोड़कर, 2,622 करोड़ रुपये का मुआवजा वसूलने के लिए चूककर्ता फर्मों की संपत्तियों को कुर्क करने सहित सभी प्रयास करने का निर्देश दिया।

ओडिशा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार ने दोषी खनन कंपनियों से जुर्माने के रूप में बड़ी राशि वसूल की है, लेकिन उनसे 2,622 करोड़ रुपये वसूले जाने बाकी हैं।

उन्होंने कहा कि अकेले पांच पट्टेदार खनन फर्मों से लगभग 2,215 करोड़ रुपये का मुआवजा वसूला जाना है और अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार बकाया रकम की शीघ्र वसूली सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी।

पीठ ने गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर ध्यान दिया, जिन्होंने 2014 में अवैध खनन पर एक जनहित याचिका दायर की थी कि चूक करने वाली कंपनियों या उनके प्रवर्तकों को भविष्य में किसी भी नीलामी में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस प्रक्रिया में राज्य के बहुमूल्य खनिज संसाधन शामिल हैं, और उनकी संपत्तियों को कुर्क करके बकाया राशि की वसूली की जा सकती है।

पीठ ने ओडिशा सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि राज्य को देय वसूली, चूक करने वाली फर्मों की संपत्तियों को कुर्क करके भी की जा सकती है।

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