ब्वॉज लॉकर रुम:लैंगिक संवेदनशीलता पर कक्षाओं और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका पर ध्यान दें निजी स्कूल

दरअसल यह मामला इंस्टाग्राम पर चल रहे एक चैट समूह ‘ब्वॉज लॉकर रूम’ से जुड़ा है। इस समूह में शामिल किशोर बच्चे नाबालिग लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें साझा कर रहे थे और बलात्कार समेत अन्य गैर कानूनी बातों की चर्चा करते थे।

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नयी दिल्ली, पांच मई लैंगिक संवेदनशीलता के विषय में स्कूल, छात्रों की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और इन मुद्दों को लेकर बच्चों के जीवन में माता-पिता की सक्रिय भूमिका ‘ब्वॉज लॉकर रुम’ जैसी स्थितियों से बचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

दरअसल यह मामला इंस्टाग्राम पर चल रहे एक चैट समूह ‘ब्वॉज लॉकर रूम’ से जुड़ा है। इस समूह में शामिल किशोर बच्चे नाबालिग लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें साझा कर रहे थे और बलात्कार समेत अन्य गैर कानूनी बातों की चर्चा करते थे।

समूह के सदस्यों की बातचीत का स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश भर गया है। माना जा रहा है कि इस समूह के सदस्य दिल्ली के नामी स्कूलों में पढ़ने वाले किशोर बच्चे हैं जिनमें अधिकांश की उम्र 13-18 वर्ष है। वे सभी नाबालिग लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें साझा कर रहे थे और उनके बारे में अश्लील बातें कर रहे थे।

मामले में दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) द्वारा इंस्टाग्राम और पुलिस को नोटिस जारी करने के बाद दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को एक नाबालिग को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की।

दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल, रोहिणी की प्रिंसिपल प्रियंका बरारा ने कहा, ‘‘ये खबरें परेशान करने वाली हैं। इस तरह की घटना को देखते हुए हमारे समाज में लैंगिक संवेदनशीलता के प्रति बच्चों को जागरुक करने और बच्चों द्वारा नस्लीय, सांस्कृतिक या शारीरिक अंतर के परे अपने साथियों का सम्मान करना सिखाने की आवश्यकता बढ़ जाती है।”

उन्होंने कहा, ‘‘स्कूली शिक्षा की इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यह एक ऐसी जगह है जहां विचारों और धारणाओं को सही दिशा दी जा सकती है।’’

रेयान इंटरनेशनल स्कूल समूह के अनुसार लैंगिक संवेदनशीलता को लेकर जल्द से जल्द विशेष कक्षाएं शुरू होनी चाहिए।

समूह के अनुसार,‘‘पूर्व-प्राथमिक के बच्चों के लिए, हम खेल और कहानियों के माध्यम से लैंगिक संवेदनशीलता से जुड़े मामलों पर बातचीत करने की कोशिश करते हैं।”

दिल्ली के एक प्रमुख स्कूल के एक प्रिंसिपल ने कहा, ‘‘स्कूलों के साथ-साथ इसमें अभिभावकों की भूमिका भी इसमें बहुत महत्वपूर्ण हैं। है। घर पर होने वाली बातचीत, बच्चों की साइबर गतिविधियों पर निगरानी नहीं रखना और बिना रोकटोक स्मार्टफोन का इस्तेमाल भी इसमे अहम भूमिका निभाते हैं।”

कई स्कूलों ने लॉकडाउन के दौरान छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की हैं और इस कारण इंटरनेट का अधिक से अधिक प्रयोग करने वाले बच्चों के लिए जोखिम बढ़ गया है।

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने 2018 में स्कूलों को शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों की भूमिका बताते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे थे जिसमें छात्रों द्वारा सुरक्षित, कानूनी ढंग से इंटरनेट के नैतिक उपयोग को बढ़ावा दिया गया था।

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