26 मई की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

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ईरान पर अमेरिका के नए हमले, युद्ध खत्म करने पर बातचीत जारी

अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल के ठिकानों और माइन लगा रही बोट पर सोमवार को हमला किया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह जानकारी दी है. हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान के शीर्ष वार्ताकार ईरान युद्ध खत्म करने पर नए दौर की बातचीत के लिए दोहा पहुंचे हैं. उधर इस्राएली सेना ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ दक्षिणी लेबनान में अभियान तेज कर दिया है. अमेरिकी हमलों का असर तेल की कीमतों पर पड़ा है. इस हमले का होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के समझौते पर असर हो सकता है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिंस ने एक बयान जारी कर कहा है, "अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा के लिए दक्षिणी ईरान में हमले किए हैं ताकि हमारी सेनाओं को ईरानी सेना के खतरे से बचा सकें." इसमें हमले के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है सिर्फ इतना कहा गया है कि हमले के लक्ष्यों में मिसाइल दागने के ठिकाने और माइन लगाने वाली बोट शामिल हैं.

हमलों के बावजूद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि समझौते तक पहुंचा जा सकता है हालांकि होर्मुज के मामले पर उनके रुख में दृढ़ता दिखाई दी.

रुबियो का कहना है, "आज कतर में बातचीत हो रही है, तो हम देखेंगे कि क्या आगे बढ़ सकते हैं. मुझे लगता है कि शुरुआती दस्तावेज की खास भाषा को लेकर बहुत आगे पीछे हो रहा है, तो इसमें थोड़ा वक्त लगेगा." दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने हमले के असर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने बंदर अब्बास के पास स्थानीय समय के हिसाब से मध्यरात्रि के करीब कई बड़ धमाकों की खबर दी है. इसके साथ ही यह भी कहा है कि दक्षिणी पोर्ट सिटी में स्थिति सामान्य है और स्थानीय अधिकारी धमाकों की वजह पता लगाने में जुटे हुए हैं.

चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच क्वाड की रणनीति पर मंथन

क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक मंगलवार को नई दिल्ली में चल रही है. भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी बैठक में भाग ले रहे हैं.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी शुरूआती टिप्पणी में कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को वैश्विक विकास और स्थिरता का प्रमुख इंजन बनाए रखना जरूरी है और इसके लिए क्वाड देशों को मिलकर समुद्री सुरक्षा और आर्थिक अवसरों को मजबूत करना होगा.

अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खनिज पहल की घोषणा की

जयशंकर ने कहा कि क्वाड का फोकस स्पष्ट रूप से इंडो-पैसिफिक पर है, जहां आपूर्ति शृंखला की मजबूती, कनेक्टिविटी से जुड़े अवरोध, विनिर्माण और संसाधनों का संतुलन तथा बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों पर काम करने की जरूरत है. उन्होंने बिना विस्तार में गए क्षेत्र से जुड़ी कुछ "चिंताओं" का जिक्र भी किया और कहा कि रणनीतिक विश्वास बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और बेहतर आर्थिक विकल्प उपलब्ध कराना समय की जरूरत है.

वहीं ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने क्वाड को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने पर जोर दिया, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में क्वाड की भूमिका और भी अहम हो गई है. उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही. यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं.