नागपुर, छह जुलाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि आदिवासी समुदाय के सदस्यों को शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनकर जीवन में आगे बढ़ने का प्रयत्न करना चाहिए तथा जनजाति समुदाय के अपने अन्य साथियों को भी राष्ट्र की मुख्यधारा का हिस्सा बनने में मदद करनी चाहिए।
देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति मुर्मू ने यहां राजभवन में महाराष्ट्र के ‘विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों’ (पीवीटीजी) के सदस्यों के साथ संवाद के दौरान यह बात कही।
अपने स्कूल के पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालय जाने के लिए अच्छे रास्ते नहीं थे तथा किताबें ले जाने के लिए उनके पास थैला तक नहीं था।
उन्होंने कहा, ‘‘स्कूल जाने के दौरान वर्षा से खुद को बचाने के लिए मैं कपड़े से अपना सिर ढक लिया करती थी। हर कदम पर संघर्ष था, लेकिन मैं चुनौतियों से उबरी और अध्यापिका बनी, फिर राज्यपाल बनी एवं अब राष्ट्रपति हूं।’’
मुर्मू ने आदिवासी समुदायों के सदस्यों से स्कूल की पढाई के बाद मन में हीनभावना पाले बिना ही उच्च शिक्षा की ओर उन्मुख होने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासियों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से मजबूत बनना चाहिए। उन्हें ऊंचे पदों पर काम करना चाहिए तथा साथी आदिवासियों को मुख्यधारा में आने में मदद करनी चाहिए।’’
महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आदिवासी विकास मंत्री विजयकुमार गावित भी इस मौके पर मौजूद थे।
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