देश की खबरें | इस समय दुनिया सामान्य से कहीं अधिक दिलचस्प है: जयशंकर
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नयी दिल्ली, तीन मार्च विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे क्षेत्रों में सहयोग के जरिये भारत और बेल्जियम के बीच ‘स्थिर’ संबंधों के अधिक समकालीन स्वरूप में विकसित होने की संभावना है।
जयशंकर ने बेल्जियम के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मैक्सिम प्रीवोट के साथ बैठक के दौरान यह टिप्पणी की।
प्रीवोट बेल्जियम की राजकुमारी एस्ट्रिड की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आर्थिक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में भारत का दौरा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य कई प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देना है।
दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने यूक्रेन की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की।
जयशंकर ने बैठक में अपने शुरुआती संबोधन में कहा, “इस समय दुनिया सामान्य से कहीं अधिक दिलचस्प है।”
उनकी यह टिप्पणी पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके यूक्रेनी समकक्ष वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच जुबानी जंग के बाद यूक्रेन संघर्ष पर नये सिरे से ध्यान केंद्रित किए जाने के बीच आई है।
ओवल ऑफिस में अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद यूरोप जेलेंस्की के समर्थन में खुलकर सामने आया है।
अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने भारत-बेल्जियम संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और याद दिलाया कि बेल्जियम स्वतंत्र भारत में दूतावास स्थापित करने वाले पहले यूरोपीय देशों में से एक था।
जयशंकर ने कहा, “और बेशक हमारे बीच ऐतिहासिक संबंध भी हैं। आपकी भूमि पर अभी भी भारतीय सैनिकों के युद्ध स्मारक हैं। हालांकि, व्यापार, उद्योग, शिक्षा, नवाचार, संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में रिश्ते बहुत अच्छे, लेकिन स्थिर हैं, और आज उनमें अधिक समकालीन स्वरूप में विकसित होने की संभावना है।”
जयशंकर ने सेमीकंडक्टर, एआई, स्वच्छ ऊर्जा और अनुसंधान एवं नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोतरफा जुड़ाव के अवसरों पर खास तौर पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “मुझे विशेष रूप से खुशी है कि हमें राजकुमारी एस्ट्रिड का स्वागत करने का मौका मिला और लगभग 360 व्यवसायों वाले आर्थिक प्रतिनिधिमंडल का आना वास्तव में उत्साहजनक है।”
जयशंकर ने कहा, “और मुझे कहना होगा कि इस दौरे से उन्हें भारत में क्या हो रहा है, इसका आकलन करने, ‘मेक इन इंडिया, डिजाइनिंग इन इंडिया, रिसर्चिंग इन इंडिया, इनोवेटिंग इन इंडिया’ का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।”
उन्होंने भरोसा जताया कि आर्थिक प्रतिनिधिमंडल उच्च स्तर का सहयोग कायम करने में मददगार साबित होगा।
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