नयी दिल्ली, नौ मई भारतीय नौसेना ने मंगलवार को कहा कि दक्षिण चीन सागर में आसियान के सदस्य देशों की नौसेनाओं के साथ उसके अभ्यास ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत बल के रूप में काम करने की दोनों पक्षों की क्षमता का प्रदर्शन किया।
दक्षिण चीन सागर में आसियान-भारत समुद्री अभ्यास का दो दिवसीय समुद्री चरण सोमवार को समाप्त हो गया। इसकी अहमियत इसलिए है कि यह ऐसे वक्त में हुआ है जब चीन की क्षेत्र में बढ़ती आक्रामकता को लेकर भारत समेत दुनिया के अहम देशों ने चिंता व्यक्त की है।
मामले की जानकारी रखने लोगों ने बताया कि चीन के कई निगरानी पोत सैन्य अभ्यास पर निगाह रख रहे थे।
चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, जो हाइड्रोकार्बन का एक बड़ा स्रोत है। हालांकि, वियतनाम, फिलीपीन और ब्रुनेई सहित आसियान के सदस्य कई देश भी इस पर दावा करते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के समुद्री चरण में नौ पोतों के लगभग 1400 कर्मियों ने हिस्सा लिया। अभ्यास के लिए भारतीय नौसेना ने स्वदेश निर्मित पोत- विध्वंसक आईएनएस दिल्ली व स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा, समुद्री गश्ती विमान पी8आई और हेलीकॉप्टर को तैनात किया था।
अधिकारियों ने कहा कि दक्षिण पूर्व राष्ट्रों का संगठन (आसियान) के सदस्य देशों की नौसेना के पोतों ने अभ्यास में हिस्सा लिया । इनमें ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे मुल्क शामिल हैं।
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