देश की खबरें | कन्नड़ भाषा में यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले पहले व्यक्ति एवं कलाकार के. शिवराम का निधन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कन्नड़ भाषा में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास करने वाले पहले व्यक्ति एवं नौकरशाह से अभिनेता बने के. शिवराम का 70 वर्ष की आयु में यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
बेंगलुरु, एक मार्च कन्नड़ में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास करने वाले पहले व्यक्ति एवं नौकरशाह से अभिनेता बने के. शिवराम का 70 वर्ष की आयु में यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि उन्होंने बृहस्पतिवार को एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे थे।
उन्होंने बताया कि रक्तचाप में उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। छह दिन पहले ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उन्होंने बताया कि कल उन्हें एक बार फिर दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मौत हो गई।
राजनीति में भी हाथ आजमा चुके शिवराम के परिवार में पत्नी और बेटी हैं।
उनके पार्थिव शरीर को आज रवीन्द्र कलाक्षेत्र में गणमान्य व्यक्तियों और शुभचिंतकों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि अंतिम संस्कार आज शाम किया जाएगा।
अपनी बुनियादी शिक्षा पूरी करने के बाद, शिवराम पुलिस विभाग में शामिल हो गए और बाद में काम करते हुए बी.ए. और एम.ए. की डिग्री पूरी की। बाद में, उन्होंने कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (केएएस) परीक्षा पास की, जिसके बाद उन्हें पुलिस उपाधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।
साल 1986 में शिवराम कन्नड़ में यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले पहले व्यक्ति बने। सात साल बाद, उन्होंने नागाथिहल्ली चंद्रशेखर निर्देशित ‘बा नल्ले मधुचंद्रके’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा।
हालांकि फिल्म हिट रही, लेकिन उनकी बाद की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, जिसके बाद उन्होंने एक नौकरशाह के रूप में अपने करियर पर ध्यान केंद्रित किया।
शिवराम ने 2013 में अपनी सेवानिवृत्ति तक बेंगलुरु क्षेत्रीय आयुक्त के रूप में कार्य किया।
इसके बाद उन्होंने राजनीति की ओर ध्यान केंद्रित किया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पहले कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) का हिस्सा रहे। उन्होंने बीजापुर से जद (एस) के टिकट पर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा ने उन्हें अपनी प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बनाया था।
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