देश की खबरें | निर्वासन की आशंकाओं के बीच सीमा के वकील बोले- वह भारत की बहू, सहानुभूति दिखाई जाए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान वापस भेजे जाने की आशंका का सामना कर रही सीमा हैदर के वकील ने कहा है कि उनके साथ दया दिखाई जानी चाहिए, क्योंकि वह भारत की बहू हैं।

नोएडा, 30 अप्रैल पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान वापस भेजे जाने की आशंका का सामना कर रही सीमा हैदर के वकील ने कहा है कि उनके साथ दया दिखाई जानी चाहिए, क्योंकि वह भारत की बहू हैं।

सीमा पहले से ही पाकिस्तान के सिंध प्रांत में शादीशुदा थी और 2023 में अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारत में घुसी थी, ताकि वह एक भारतीय व्यक्ति से शादी कर सके।

केंद्र द्वारा आतंकी हमले के जवाब में सभी पाकिस्तानी नागरिकों को महीना खत्म होने से पहले भारत छोड़ने का आदेश दिए जाने के बाद वह नए सिरे से जांच का सामना कर रही है।

उनके वकील ए पी सिंह ने कहा, "सीमा ने पाकिस्तान में रहते हुए हिंदू धर्म अपना लिया और नेपाल तथा भारत में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार एक भारतीय से विवाह कर लिया। इसलिए अब वह भारत की बहू हैं और लोगों को उनके प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "कुछ लोग पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सीमा को निशाना बना रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। उनके मामले को मानवीय आधार पर देखा जाना चाहिए।"

सिंह ने बताया कि पाकिस्तान में रहते हुए सीमा ने अपने पति को तलाक दे दिया और अपने पिता के घर चली गई। पिता की मौत के बाद उसकी मुलाकात सचिन मीना से हुई। बाद में दोनों दोस्त बन गए और सीमा ने पाकिस्तान में हिंदू धर्म अपना लिया।

उन्होंने कहा "इसके बाद सीमा नेपाल आ गई, जहां उसने सचिन से शादी कर ली। उसके बाद उसने भारत में कानूनी रूप से धर्म परिवर्तन कर लिया। दंपति की एक बच्ची है और उसका नाम भारती रखा गया है, जिसका मतलब मीरा होता है।

वकील ने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार ने लड़की को जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया है।"

सीमा ने 26 अप्रैल को सरकार से अपील की कि उसे भारत में रहने दिया जाए।

एक वीडियो क्लिप में उसे यह कहते हुए सुना गया, "मैं पाकिस्तान की बेटी थी, लेकिन अब मैं भारत की बहू हूं। मैं पाकिस्तान नहीं जाना चाहती। मैं प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी और उप्र के मुख्यमंत्री योगी (आदित्यनाथ) से अपील करती हूं कि मुझे भारत में रहने दिया जाए।"

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