जरुरी जानकारी | फ्यूचर-रिलायंस सौदे को रोकवाने, किशोर बियाणी की गिरफ्तारी की अर्जी के साथ अमेजन पहुंची अदलात
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. अमेरिकी आन लाइन खुदरा बाजार कंपनी अमेजन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर भारत में खुदरा स्टोर चलाने वाले कंपनी समूह फ्यूचर ग्रुप के मुख्य कार्यकारी किशोर बियाणी समेत इसके संस्थापकों की गिरफ्तारी , उनकी सम्पत्तियों को जब्त कराने तथा समूह का कारोबार रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचने के करार को रोके जाने की मांग की है।
नयी दिल्ली, 25 जनवरी अमेरिकी आन लाइन खुदरा बाजार कंपनी अमेजन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर भारत में खुदरा स्टोर चलाने वाले कंपनी समूह फ्यूचर ग्रुप के मुख्य कार्यकारी किशोर बियाणी समेत इसके संस्थापकों की गिरफ्तारी , उनकी सम्पत्तियों को जब्त कराने तथा समूह का कारोबार रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचने के करार को रोके जाने की मांग की है।
याचिका में अमेजन ने अपने भागीदार फ्यूचर समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच हुए 24,713 करोड़ रुपये के सौदे के खिलाफ उसकी अर्जी पर फ्यूचर के विरुद्ध सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत के आदेश को लागू कराने का अनुरोध किया है।
अमेजन ने मांग की है कि बियाणी परिवार को उनकी चल - अचल सम्पत्ति घोषित करने का निर्देश दिया जाए और उनकी सम्पत्ति जब्त की जाए। उसने बियाणी, उनकी बेटी अश्नी और संस्थापक परिवार के अन्य सात सदस्यों तथा फ्यूचर समूह के कंपनी सचिव सहित तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किए जाने की भी मांग की है।
अमेरिकी आन लाइन कारोबारी कंपनी ने फ्यूचर समूह की कंपनियों के निदेशकों को सिविल जेल में डालने के निर्देश दिए जाने की भी मांग की है।
बियाणी ने इससे पहले कहा था कि उन्हें कर्ज के बोझ से निपटने के लिए अमेजन की ओर से मदद नहीं आती देख रिलायंस को कंपनी के कारोबार बेचने का करार करना पड़ा।
अमेजन की यह अर्जी ऐसे समय दाखिल हुई है जबकि कुछ दिन पहले ही बाजार विनियामक सेबी ने फ्यूचर-रिलायंस इंडस्ट्रीज करोर को मंजूरी दी है।
अमेजन ने कहा है कि इस सौदे के खिलाफ सिंगापुर के आपातकालीन मध्यस्थ (ईए) की अंतरिम रोक भारतीय मध्यस्थता एवं समाधान अधिनियम के तहत लागू करने योग्य है। इसे भारतीय दिवानी कानून के तहत भी लागू किया जा सकता है।
पीटीआई- से अमेजनकी इस याचिका की एक प्रति को देखा है। इसमें कहा गया है कि सिंगापुर मध्यस्थ निर्णय केंद्र के अंतरिम ओदश की वैधता 23 जनवरी तक थी । उसे अब अगले किसी संशोधन तक वैध करार दिया गया है।
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