देश की खबरें | एम्स के चिकित्सकों ने छाती और पेट से जुड़ी दो जुड़वां बच्चियों को एक-दूसरे से अलग किया

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नयी दिल्ली, 26 जुलाई राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों ने छाती और पेट के उपरी हिस्से से आपस में जुड़ी दो जुड़वां बहनों -ऋिद्धि और सिद्धि को सकुशल अलग करने में सफलता हासिल की है।

बालचिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मीनू बाजपेयी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बरेली की दीपिका गुप्ता जब चार महीने की गर्भवती थीं तभी पता चल गया था कि उनके गर्भ में छाती और पेट से आपस में जुड़े जुड़वां बच्चे हैं।

उन्होंने बताया कि बाद में उन्हें इलाज के लिए एम्स जाने की सलाह दी गयी क्योंकि स्थानीय स्तर पर उन्नत चिकित्सा सुविधाएं नहीं थीं।

ये दोनों बच्चियां पिछले साल सात जुलाई को जन्मीं और दोनों पांच महीने तक गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रहीं। उन्हें आठ जून को नौ घंटे तक चली सर्जरी के बाद एक दूसरे से अलग किया गया। दोनों बच्चियों का पहला जन्मदिन अस्पताल में ही मनाया गया।

बाल चिकित्सा सर्जरी के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. प्रबुद्ध गोयल ने कहा, ‘‘यह विसंगति अजीब थी जहां पसलियां, यकृत, डायफ्रॉम आदि आपस में मिले हुए थे। दोनों ही हृदय एक दूसरे के बिल्कुल करीब थे यानी करीब-करीब स्पर्श कर रहे थे। ....’’

उन्होंने कहा कि इन बच्चियों का 11 महीने की उम्र में ऑपरेशन किया गया जब वे सर्जरी की क्रिया को बर्दाश्त करने की स्थिति में पहुंच गयी थीं।

डॉ. बाजपेयी ने कहा कि यह सर्जरी एम्स के नये मातृ एवं बाल खंड में ‘जनरल एनीस्थेसिया’ के प्रभाव में किया गया तथा सर्जरी में नौ घंटे लगे एवं यदि सर्जरी पूर्व एवं पश्चात एनीस्थेसिया की अवधि को जोड़ दिया जाए तो यह करीब साढ़े बारह घंटे की अवधि है।

ये दोनों बच्चियां अब भी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन वे अब ठीकठाक स्थिति में हैं। उनके माता-पिता दीपिका और अंकुर गुप्ता राहत की सांस ले रहे हैं और उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। दंपति ने बच्चियों को बचाने के लिए चिकित्सकों को खुले दिल से धन्यवाद दिया है।

दीपिका ने कहा, ‘‘ जब यह सर्जरी की गयी तब हम बहुत चिंतित थे। लेकिन ईश्वर और चिकित्सकों को धन्यवाद कि हमारी बच्चियों को एक नया जीवनदान मिला।’’

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