ताजा खबरें | अन्नाद्रमुक सदस्य ने श्रीलंका से समझौता कर कच्चातीवु द्वीप वापस लेने की राज्यसभा में उठाई मांग

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में बुधवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के एक सदस्य ने कच्चातीवु द्वीप श्रीलंका को सशर्त देने से भारतीय मछुआरों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया और मांग की कि सरकार 1974 में इस सिलसिले में हुए समझौते को रद्द कर वह द्वीप वापस ले ताकि मछुआरों के हितों की रक्षा हो सके।

नयी दिल्ली, छह अप्रैल राज्यसभा में बुधवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के एक सदस्य ने कच्चातीवु द्वीप श्रीलंका को सशर्त देने से भारतीय मछुआरों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया और मांग की कि सरकार 1974 में इस सिलसिले में हुए समझौते को रद्द कर वह द्वीप वापस ले ताकि मछुआरों के हितों की रक्षा हो सके।

अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 1974 में द्वीपीय देश श्रीलंका के साथ समझौता कर कच्चातीवु द्वीप उसे देने के बाद से तमिलनाडु के मछुआरों का भविष्य ही दांव पर लग गया।

उन्होंने कहा कि आए दिन श्रीलंका की नौसेना अपने जल क्षेत्र में मछली पकड़ने का आरोप लगाते हुए तमिलनाडु के मछुआरों को पकड़ लेती है, उनके साथ मार-पीट करती है तथा उनकी नौकाएं जब्त कर लेती है।

थंबीदुरै ने कहा कि कच्चातीवु द्वीप में मछली पकड़ना तमिलनाडु के मछुआरों का परंपरागत अधिकार है लेकिन समझौते की वजह से उनके इस अधिकार का हनन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की विभिन्न सरकारों ने इस संबंध में कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिखा लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ और मछुआरों की मुश्किल ज्यों की त्यों बनी रही।

उन्होंने सरकार से इस मुद्दे का तत्काल समाधान करने की अपील की।

गौरतलब है कि श्रीलंका और रामेश्वरम (भारत) के बीच स्थित कच्चातीवु द्वीप का पारंपरिक रूप से श्रीलंका के तमिलों और तमिलनाडु के मछुआरों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। भारत ने 1974 में एक सशर्त समझौते के तहत यह द्वीप को श्रीलंका को दे दिया।

शून्यकाल में ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बिनय विश्वम ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया और इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार से एक समिति बनाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और इसी दौरान कोविड महामारी का कहर टूट पड़ा और कई लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि लोग जीवन जी रहे हैं बल्कि यह कहना उचित होगा कि किसी तरह उनका गुजर-बसर हो रहा है।’’

विश्वम ने मांग की कि सरकार को एक समिति गठित करनी चाहिए और उसे तीन से चार माह में रिपोर्ट देने के लिए कहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार को ठोस योजना बना कर बेरोजगारी की समस्या के समाधान का प्रयास करना चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी के कैलाश सोनी ने मांग की कि सांसद क्षेत्रीय विकास निधि (एमपीएलएडी) में कम से कम दो माह के लिए ऐसा प्रावधान किया जाना चाहिए जिसके तहत इस निधि की कुछ राशि का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव के लिए हो सके।

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड काल में ऐसी भी स्थिति देखने को मिली जब अस्पतालों में आवश्यक उपकरण और मशीनें तो उपलब्ध थीं लेकिन वे बंद पड़ी थीं।’’

सोनी ने कहा कि उन्होंने मध्य प्रदेश में ऐसे ही एक अस्पताल में, अपनी सांसद निधि की कुछ राशि चिकित्सा उपकरणों और बंद पड़ी मशीन को चालू करने के लिए भेजी थी लेकिन वह राशि उन्हें वापस कर दी गई।

सोनी ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि सांसद निधि की राशि को चिकित्सा उपकरणों तथा मशीनों के लिए खर्च करने का प्रावधान नहीं है।’’

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्य वी विजयसाई रेड्डी ने अनुबंध पर काम करने वाले शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले अपरिहार्य स्थितियों में ही इस तरह की नियुक्तियां की जाती थीं लेकिन अब तो ‘‘अनुबंध पर नियुक्ति’’ एक चलन बन गया है।

उन्होंने कहा कि हर साल करीब एक लाख से अधिक शिक्षकों को अनुबंध पर नियुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि अनुबंध पर होने की वजह से उन्हें न तो वेतन संबंधी लाभ मिल पाते हैं और न ही उनकी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है। अनुबंध पर नौकरी की वजह से होने वाली समस्याओं के चलते प्रतिभावान शिक्षक शिक्षा से ही विमुख होने लगते हैं।’’

इस स्थिति को विद्यार्थियों और देश के लिए नुकसानदायक बताते हुए रेड्डी ने कहा कि इस समस्या के हल के लिए विशेषज्ञों से विचारविमर्श कर एक ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।

शिवसेना सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के कुछ प्रावधान महिलाओं के खिलाफ हैं और उनसे समानता के अधिकार का उल्लंघन होता है, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सदस्य के केशव राव ने तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के दो कारखानों के बंद होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिले की 48 फीसदी जनजाति आबादी को इसकी वजह से बेरोजगारी तथा अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

बीजू जनता दल के सदस्य सुजीत कुमार ने ओड़िशा के कोल्हापुर केंद्रीय विश्वविद्यालय में कुलपति और शिक्षकों के पद रिक्त होने का जिक्र करते हुए सरकार से इन पदों पर तत्काल भर्ती की मांग की। इसी पार्टी की ममता मोहंता ने सिमलीपाल अभयारण्य से जुड़ा मुद्दा उठाया।

मनीषा ब्रजेन्द्र

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\