ताजा खबरें | अधिवक्ता संशोधन विधेयक को संसद की मंजूरी मिली
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. संसद ने सोमवार को ‘अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2023’ को मंजूरी प्रदान की। इस विधेयक का मकसद अदालत परिसरों में दलालों की भूमिका को खत्म करना है।
नयी दिल्ली, चार दिसंबर संसद ने सोमवार को ‘अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2023’ को मंजूरी प्रदान की। इस विधेयक का मकसद अदालत परिसरों में दलालों की भूमिका को खत्म करना है।
लोकसभा ने विधेयक पर विस्तृत चर्चा और विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के जवाब के बाद ध्वनिमत से स्वीकृति दी। राज्यसभा में यह विधेयक पिछले मानसून सत्र में पारित किया गया था।
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह तय किया है कि उन औपनिवेशिक कानूनों को निरस्त किया जाएगा जो अनुपयोगी हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस संशोधन को लाने का उद्देश्य पूरी तरह पवित्र हैं।’’
मंत्री का कहना था कि मौजूदा सरकार में 1486 औपनिवेशिक कानून समाप्त कर दिए गए, जबकि संप्रग सरकार के 10 साल के कार्यकाल में एक भी ऐसा कानून खत्म नहीं किया गया।
मेघवाल के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दी।
सरकार ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के परामर्श से लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879 को निरस्त करने और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन करने का निर्णय लिया है।
विधेयक का उद्देश्य ‘अनावश्यक अधिनियमों’ की संख्या कम करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में ‘लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879’ की धारा 36 के प्रावधानों को शामिल करना है।
यह धारा अदालतों में दलालों की सूची तैयार करने और प्रकाशित करने की शक्ति प्रदान करती है।
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