देश की खबरें | अदालतों में ‘बार और बेंच’ के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध जरूरी : उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली, नौ जनवरी उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अदालतों में न्याय प्रशासन को सुचारू तरीके से चलाने के लिए बार (वकील) और बेंच (पीठ) के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध जरूरी है।

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने यह टिप्पणी एक वकील द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए की, जिसने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

अधिवक्ता के व्यवहार पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मामले को बार काउंसिल को भेजा था। उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ अधिवक्ता ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

इसपर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘अदालत में न्याय प्रशासन के सुचारु तरीके से चलने के लिए बार और बेंच के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध अनिवार्य है। किसी भी अधिवक्ता को अदालत में अभद्र व्यवहार का लाभ नहीं मिलना चाहिए।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘इससे अंतत: अदालत कक्ष का माहौल खराब होता है और अंतत: यह वादी के मामले को खराब कर सकता है और वादी बिना गलती के नतीजा भुगत सकता है।’’

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वकालत कर रहे वकील ने अपने कृत्य के लिये उच्च न्यायालय के सामने बिना शर्त माफी मांगी, जिसके कारण वह आदेश पारित किया गया।

याचिकाकर्ता ने बिना शर्त माफी मांगी और शीर्ष अदालत के समक्ष हलफनामा दिया कि भविष्य में उसकी ओर से ऐसा व्यवहार दोबारा नहीं होगा। इसके बाद शीर्ष अदालत ने वकील से कहा कि वह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने बिना शर्त माफी मांगे और उच्च न्यायालय से उसकी माफी पर विचार करने का अनुरोध किया।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमें यह जानकर खुशी है कि एकल न्यायाधीश ने दया दिखाई और याचिकाकर्ता की तरफ से बिना शर्त मांगी गई माफी को स्वीकार कर लिया है। 24 दिसंबर 2021 के आदेश में उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की ओर से मांगी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार करते हुए पहले के आदेश को वापस ले लिया है।’’

पीठ ने कहा कि इसके मद्देनजर इस मामले में आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है और याचिका का निस्तारण किया जाता है।

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