देश की खबरें | आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बिना सिकल सेल रोग मुक्त भारत संभव नहीं: जुएल ओराम

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नयी दिल्ली, 19 जून केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कोविड महामारी से निपटने में ‘आशा’ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की प्रशंसा करते हुए बुधवार को कहा कि भारत को ‘सिकल सेल’ बीमारी से मुक्त बनाने के सरकार के लक्ष्य को हासिल करने में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओराम ने कहा कि शीर्ष विशेषज्ञ और डॉक्टर राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में योगदान देंगे, लेकिन सफलता केवल जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की भागीदारी से ही संभव होगी।

जनजातीय कार्य मंत्री ओराम ने कहा, ‘‘आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राम पंचायत स्तर पर काम करती हैं। महामारी के दौरान उन्होंने शीर्ष चिकित्सकों से भी अधिक काम किया। मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, जब तक हम जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को इस मिशन में शामिल नहीं करेंगे, तब तक यह सफल नहीं होगा। जब मलेरिया फैला था, तो मलेरिया निरीक्षक गांव के हर घर में जाकर नमूने एकत्र करते थे। हमें सिकल सेल बीमारी के उन्मूलन के लिए भी ऐसा ही दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।’’

मंत्री ने यह भी कहा कि शीर्ष डॉक्टर योजना बना सकते हैं और अपने ज्ञान और संसाधनों को साझा कर सकते हैं, लेकिन जमीनी स्तर के कर्मियों को वास्तव में काम करना होगा। ओराम ने सिकल सेल एनीमिया से निपटने के मिशन में आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों को शामिल करने का सुझाव दिया।

पिछले साल एक जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य 2047 तक इस बीमारी का उन्मूलन करना है।

सिकल सेल रोग वंशानुगत रक्त विकारों के एक समूह को संदर्भित करता है, जिसमें आनुवंशिक उत्परिवर्तन असामान्य हीमोग्लोबिन को प्रभावित करता है, जिससे लाल रक्त कोशिकायें सिकल के आकार की हो जाती हैं। ये सिकल के आकार की कोशिकाएं रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा करती हैं, जिससे एनीमिया, दर्द, संक्रमण और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

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