जरुरी जानकारी | निजी डेटा के कुछ हिस्से से छेड़छाड़ का 87 प्रतिशत भारतीयों को संदेहः रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नागरिकों के एक बड़े हिस्से का मानना है कि उनके निजी डेटा का कुछ अंश पहले से ही सार्वजनिक डोमेन या डेटाबेस में पहुंच चुका है और उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ चुकी है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

नयी दिल्ली, तीन मार्च नागरिकों के एक बड़े हिस्से का मानना है कि उनके निजी डेटा का कुछ अंश पहले से ही सार्वजनिक डोमेन या डेटाबेस में पहुंच चुका है और उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ चुकी है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

ऑनलाइन मंच लोकलसर्किल्स ने सोमवार को पेश एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा कि 87 प्रतिशत नागरिकों को लगता ​​​​है कि उनका व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक रूप से लीक हो गया था।

सर्वेक्षण के दौरान 25 अगस्त, 2024 से 28 फरवरी, 2025 के बीच देश के 375 जिलों में रहने वाले नागरिकों से 36,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं ली गईं। हालांकि, प्रत्येक प्रश्न पर प्रतिक्रियाओं की संख्या अलग-अलग थी।

अधिकांश उत्तरदाताओं ने सार्वजनिक डोमेन में अपने डेटा से समझौता करने के लिए दूरसंचार कंपनियों, ई-कॉमर्स मंचों, बैंकों और वित्तीय सेवा प्रदाताओं, सरकारी विभागों आदि को दोषी ठहराया है।

व्यक्तिगत डेटा लीक होने की बात कहने वाले भारतीयों में से आधे से अधिक लोगों का मानना है कि या तो उनके आधार या पैन कार्ड विवरण या दोनों के साथ छेड़छाड़ की गई है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, जिन नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा लीक हुआ है और सार्वजनिक डोमेन में है, वे इसके लिए सरकार, दूरसंचार कंपनियों, बैंकों और ई-कॉमर्स मंचों के विभिन्न अंगों को जिम्मेदार मानते हैं।

इसमें से 65 प्रतिशत लोग दूरसंचार सेवा देने वाली कंपनियों को इस लीक के लिए जिम्मेदार मानते हैं जबकि ई-कॉमर्स कंपनियों के मामले में अनुपात 63 प्रतिशत का है।

करीब 56 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ‘बैंक और वित्तीय सेवा प्रदाताओं’ को इस डेटा लीक के लिए दोषी ठहराया।

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