जरुरी जानकारी | देश में 2023-24 में 8.9 करोड़ शहरी महिलाएं श्रम बाजार से बाहर रहीं

नयी दिल्ली, सात मार्च वित्त वर्ष 2023-24 में 8.9 करोड़ से अधिक शहरी महिलाएं श्रम बाजार से बाहर रहीं और ऐसा पिछले छह वर्षों में महिलाओं के रोजगार में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के बावजूद हुआ।

ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, चेन्नई की रिपोर्ट 'भारत का स्त्री-पुरूष रोजगार विरोधाभास' शहरी भारत में महिलाओं की बेरोजगारी के बारे में बताती है। इस रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पेश किया गया।

इसने शिक्षित महिलाओं के कौशल के कम उपयोग और स्त्री-पुरूष विविधता के कारण होने वाले जोखिम सहित अन्य चुनौतियों के बारे में भी बताया।

यह रिपोर्ट आवधिक श्रम सर्वेक्षण, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और समय उपयोग सर्वेक्षण के माध्यमिक आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।

रिपोर्ट में कहा गया, ''भारत में व्यक्तिगत पसंद या सामाजिक मानदंडों की बाधाओं के कारण 1.9 करोड़ से अधिक स्नातक शिक्षित शहरी महिलाओं के कौशल का उपयोग नहीं हो रहा। इससे शैक्षिक निवेश की बर्बादी का पता चलता है।''

ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के डीन सुरेश रामनाथन ने कहा कि शहरी भारत में महिलाओं के कार्यरत रहने के बावजूद उन्हें पति द्वारा हिंसा का जोखिम रहता है और कुछ मामलों में नौकरीपेशा महिलाएं पति के दुर्व्यवहार को उचित ठहराती हैं।

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