देश की खबरें | छत्तीसगढ़ में 26 लाख रुपए के इनामी चार नक्सली समेत 22 ने किया आत्मसमर्पण

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में कुल 26 लाख रुपए के इनामी चार नक्सलियों समेत 22 माओवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

बीजापुर, आठ अप्रैल छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में कुल 26 लाख रुपए के इनामी चार नक्सलियों समेत 22 माओवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में चार इनामी नक्सलियों कमली हेमला उर्फ सोमे (32), मुया माड़वी उर्फ राजेश (19), सोनू तांती (28) और महेश पुनेम (20) समेत 22 उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाली नक्सली कमली हेमला पीएजीए बटालियन नंबर एक की सदस्य है तथा उसके सर पर आठ लाख रुपए का इनाम है।

उन्होंने बताया कि नक्सली मुया माड़वी तेलंगाना स्टेट कमेटी के अंतर्गत पार्टी सदस्य है तथा उस पर भी आठ लाख रुपए का इनाम है।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले पश्चिम बस्तर डिवीजन प्रेस टीम के कमांडर सोनू ताती और पीएलजीए सदस्य महेश पुनेम पर पांच—पांच लाख रुपए का इनाम है।

उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का नक्सली संगठन के विचारों से मोहभंग हो गया है तथा वह संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद से परेशान थे। उन्होंने समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने के लिए आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने वाले सभी माओवादियों को प्रोत्साहन स्वरूप 50-50 हजार रुपए का चेक प्रदान किया गया है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक नक्सली घटनाओं में शामिल 172 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं तथा 179 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 83 नक्सली मारे गए है।

बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र कुमार यादव ने नक्सलियों से अपील की है कि वे सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों।

उन्होंने नक्सलियों से कहा है कि वे बाहरी लोगों की भ्रामक बातों और विचारधारा से बाहर निकलें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों, जहां वे निर्भीक रूप से सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।

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