देश की खबरें | 1997 उपहार अग्निकांड: न्यायालय ने फर्म को निचली अदालत जाने की अनुमति दी
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नयी दिल्ली, 27 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने ‘अंसल थिएटर्स एंड क्लबोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड’ को राष्ट्रीय राजधानी स्थित उपहार सिनेमाघर की सीलिंग हटाने के अनुरोध को लेकर निचली अदालत जाने की बृहस्पतिवार को अनुमति दी।
सिनेमा हॉल में 13 जून 1997 को बॉलीवुड फिल्म ‘बॉर्डर’ की स्क्रीनिंग के दौरान आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ, न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने निर्देश दिया कि निचली अदालत 10 सप्ताह के भीतर फर्म द्वारा दाखिल की गई याचिका पर कानून के अनुसार फैसला कर सकती है।
शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की दलीलों को दर्ज किया कि उनका संपत्ति पर कोई दावा नहीं है।
दिल्ली पुलिस और सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने कहा कि कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करने की जरूरत है, जिसके लिए उपयुक्त मंच निचली अदालत है और जहां से जांच के तहत संपत्ति की सीलिंग को हटाने का अनुरोध किया जा सकता है।
उपहार त्रासदी पीड़ितों के संघ (एवीयूटी) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा कि शीर्ष अदालत ने अंसल बंधुओं को दिल्ली में एक ‘ट्रॉमा सेंटर’ के निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा था।
उन्होंने कहा कि केवल दिल्ली सरकार ही बता सकती है कि 60 करोड़ रुपये जमा किये गये हैं या नहीं, और सुझाव दिया कि उनके वकील से इस संबंध में निर्देश लेने को कहा जाना चाहिए।
‘अंसल थिएटर्स एंड क्लबोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड’ के पूर्व निदेशकों सुशील अंसल और गोपाल अंसल के वकील ने कहा कि द्वारका में बनने वाले ‘ट्रॉमा सेंटर’ के निर्माण के लिए वे पहले ही 60 करोड़ रुपये जमा कर चुके हैं।
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