Sawan Special: भोलेनाथ के इन मंदिरों की अनोखी परंपरा का राज क्या है? सिगरेट और शराब से जुड़ी है कहानी
Sawan Special Story: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. हालांकि, उत्तर प्रदेश में दो ऐसे धार्मिक स्थल भी हैं, जहां की परंपराएं आम मंदिरों से बिल्कुल अलग मानी जाती हैं. कहीं बाबा की आरती सिगरेट से की जाती है तो कहीं शिवलिंग पर शराब अर्पित करने की मान्यता है. इन मंदिरों से जुड़ी लोक मान्यताएं वर्षों से श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रही हैं.
मेरठ का धन्ना बाबा धाम, जहां सिगरेट से होती है आरती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेरठ जिले के कंकरखेड़ा स्थित कासमपुर गांव में धन्ना बाबा की समाधि है, जिसे श्रद्धालु धन्ना बाबा धाम के नाम से जानते हैं. यहां की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि बाबा की आरती अगरबत्ती या धूप से नहीं, बल्कि सिगरेट से की जाती है.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से बाबा प्रसन्न होते हैं और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यहां खील-बताशा, चना-गुड़ का प्रसाद चढ़ाया जाता है. कुछ विशेष अवसरों पर श्रद्धालु मांस का भोग भी अर्पित करते हैं. धन्ना बाबा को मां मंशा देवी का परम भक्त माना जाता है और उनकी समाधि आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता सुनील दत्त भी यहां मन्नत मांगने पहुंचे थे. ऐसी मान्यता है कि बेटे संजय दत्त की जमानत की कामना पूरी होने के बाद उन्होंने दोबारा यहां आकर बाबा का आभार व्यक्त किया था.
सीतापुर का खबीस बाबा मंदिर, जहां चढ़ाई जाती है शराब
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के अटवा गांव में स्थित खबीस बाबा मंदिर भी अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां श्रद्धालु शिवलिंग पर दूध या गंगाजल की जगह शराब अर्पित करते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, खबीस बाबा को शराब चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में बंदर भी रहते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि कई बार ये बंदर भक्तों द्वारा चढ़ाई गई शराब पीते हुए भी दिखाई देते हैं. मंदिर में आने वाले लोग शराब की बोतल और गिलास चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगते हैं.
आस्था और स्थानीय परंपराओं का अनोखा संगम
धन्ना बाबा धाम और खबीस बाबा मंदिर की ये परंपराएं स्थानीय लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. देशभर से श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों पर अपनी आस्था के साथ पहुंचते हैं. हालांकि, इन मंदिरों में प्रचलित पूजा-पद्धतियां पारंपरिक शिव मंदिरों से अलग हैं और इन्हें स्थानीय धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है.